जब एक ही फिल्म में करण जोहर जैसा दिग्गज निर्माता निर्देशक हो, पर्दे पर लोगों को बॉलीवुड के शहेंशाह अमिताभ बच्चन और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान एक साथ हो, शाहरुख़ काजोल की सफल जोड़ी हो तो सब दर्शक इस फिल्म से बॉक्स ऑफीस पर विस्फोट करने की उम्मीद रखते हैं| पूरी तरह तो नहीं लेकिन काफ़ी हद तक फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरी| यह फिल्म दर्शकों को हसती,रूलाती,उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाती है और आपको अपने माँ बाप के बारे में सोचने पर बार बार मजबूर करती है|
यशवर्धन रायचंद(अमिताभ बच्चन) शहर का अमीर, नामी और इज़्ज़तदार इंसान है जिसके दो बेटे हैं राहुल(शाहरुख़ खान) और रोहन(हृतिक रोशन)| राहुल को यश और उसकी बीवी नंदिनी(जया बच्चन) ने बचपन में गोद लिया होता है और यश राहुल को पढ़ने के लिए विदेश भेज देता है| अपनी पढ़ाई पूरी करके जब राहुल घर लौटता है तो उसके पिता उसकी शादी अपने बेहद जिगरी दोस्त की बेटी नैना (रानी मुखेर्जी) से करना चाहते हैं| नैना भी राहुल से प्यार करती है| पर इसी बीच राहुल को किसी और लड़की से प्यार हो जाता है जो हैसियत के मुक़ाबले उनके आगे नही ठहरती| शाहरुख अपने पिता की मर्ज़ी के खिलाफ अंजलि(काजोल देवगन) से शादी कर लेता है| गुस्से मे आकर यश राहुल को अपनी जिंदगी से निकल देता है|
राहुल अपनी पत्नी के साथ विदेश जाकर अपनी नयी दुनिया बसा लेता है| उसे मलाल है की जिस पिता ने उसे बचपन मे गोद लेकर इस काबिल बनाया उसी पिता ने एक ही पल मे उसे बेगाना कर दिया| वहीं बड़े होने के बाद जब रोहन जो पढ़ाई के लिए बाहर गया हुया था और इन सब बातों से अंजान था उसे अपनी दादी से सारी कहानी का पता चलती हैं और वह अपनी दादी से वादा करता है की वह अपने भाई और भाभी को वापस लाकर अपना परिवार पूरा करेगा| रोहन अपने बड़े भाई की खोज में विदेश चला जाता है और वहाँ राहुल और अंजलि के घर किराए पर रहने लग जाता है लेकिन वह अपना नाम नहीं बताता| इस काम मे पूजा(करीना कपूर) उसकी मदद करती है जो अंजलि की छोटी बहन है और उसी कॉलेज मे पढ़ती है जिसमे रोहन पढ़ता है| रोहन अपने प्यार का फायदा उठाकर यश नंदिनी को भी लंदन बुलाकर उन्ह एक बार राहुल और अंजलि से मिलवाने की कोशिश करता है|
अब रोहन किस तरह राहुल और यश को फिर से एक करता है और किस तरह उनका परिवार पूरा होता है इस फिल्म का चरम है|
करण जोहर ने निर्देशन में अपना जादू बिखेरा है| अंजलि और उसके बेटे द्वारा राष्ट्रगान का दृश्य लोगों के दिमाग़ में लंबे समय तक रहेगा| किरण जोएहाँ ने केमरा से अच्छा कम किया है और फिल्म में सभी कलाकारों के कपड़े और पहनावा उच्च कोटि का है| शर्मिशता रॉय द्वारा दिया गया तकनीकी पक्ष बहुत लाजवाब है|
शाहरुख़ खान और अमिताभ बच्चन दोनों ने बेहतरीन अभिनय किया है लेकिन जो दर्शक उन दोनों में मोहब्बतें वाली जोड़ी की आस लगाए बैठे थे उन्हें थोड़ी नाराज़गी होगी| हृतिक रोशन का काम भी सराहनीय है| काजोल एक मस्त,खुशदील पर एक मुफ़त पंजाबी लड़की के रोल में जची हैं| करण जोहर की बाकी फिल्मों की तरह इस फिल्म का संगीत भी दर्शकों को बेहद पसंद आया है और फिल्म मे जान फूंकता है| हर गाना एक से बढ़कर एक है और दर्शकाओं के जहाँ बैठ जाता है| कुल मिलकर पटकथा नयी ना होने के बावजूद भी अच्छे निर्देशन से फिल्म दर्शकों का दिल जीतने मे कामयाद रही|
गाने:
| बोले चूड़ियाँ | कभी खुशी कभी गम | सूरज हुआ मद्धम | से शावा शावा | यह लड़की हाय अल्लाह | दीवाना है देखो |
| निर्देशक | करण जोहर |
| निर्माता | यश जोहर, हीरु जोहर |
| कलाकार | हृतिक रोशन, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, शाहरुख़ खान, काजोल देवगन, करीना कपूर, रानी मुखेर्जी, फ़रीदा जलाल, आलोक नाथ |
| संगीत | बबलू चाक्रोव्रती , संदीप शाँडिल्या |
| कहानी | करण जोहर |
| तारीख | 14 दिसंबर 2001 |
