मैं भूल जाऊँ तुम्हें
गायक - जगजीत सिंह
मैं भूल जाऊँ तुम्हें -2, अब यही मुनासिब है
मैं भूल जाऊँ तुम्हें, अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ -2
कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो कोई ख्वाब नहीं
यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूं, कम्बख्त
भुला सका ना ये वो सिलसिला जो था भी नहीं -2
वो एक ख्याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हम में कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं
अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए -2
तुम्हें भुलाना भी चाहूं तो किस तरह भूलूँ
की तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो कोई ख्वाब नहीं -3





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















