कभी यूँ भी तो हो
गायक - जगजीत सिंह
कभी यूँ भी तो हो -2
दरिया का साहिल हो, पूरी चाँद की रात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो -2
परियों की महफ़िल हो, कोई तुम्हारी बात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो -2
कभी यूँ भी तो हो
ये नरम मुलायम ठंडी हवाएँ
जब घर से तुम्हारे गुज़रें, तुम्हारी खुश्बू चुराएँ
मेरे घर ले आएँ
कभी यूँ भी तो हो -2
सूनी हर महफ़िल हो, कोई ना मेरे साथ हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो -2
कभी यूँ भी तो हो
ये बादल ऐसा टूट के बरसे
मेरे दिल की तरह मिलने को, तुम्हारा दिल भी तरसे
तुम निकलो घर से
कभी यूँ भी तो हो -2
तन्हाई हो दिल हो, बूंदे हों बरसात हो और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो -2
दरिया का साहिल हो, पुरी चाँद की रात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो -4





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















