विज्ञान और अंधविश्वास मे तो जंग चलती ही रहती है| इस जंग को आगे बढ़ाया है राम गोपाल वर्मा की 'फूँक' ने जो अंधविश्वास का पक्ष मजबूत करती है| डर एक ऐसा नकारात्मक एहसास है, जो हर दर्शक वर्ग समय-समय पर महसूस करना चाहता है और इसी वजह से ऐसी फिल्में समय-समय पर आती रहती है, जो केवल तनिक तौर पर डराती है और फिर सेलुलाय्ड के गोदाम में गुम जाती है|
अंधविश्वास पर आधारित 'फूँक' में आप को डरावने रंग रूप वाले चेहरे देखने को तो नही मिलेंगे लेकिन फिर भी डर का थोडा एहसास होगा| पृष्ठभूमि संगीत का भी काफ़ी प्रभावशाली उपयोग किया गया है| संगीत निर्देशक अमर मोहिले ने अपनी पहली हे फिल्म में अच्छी छाप छोड़ी है| फिल्म को बढ़ावा देने के लिए ये भी एलान किया गया की जो अकेले इस फिल्म को सिनिमा हॉल मे देखेगा उसे 1 लाख रुपय इनाम दिया जाएगा|
कहानी संक्षिप्त मगर रोचक है| राजीव(सुदीप मालविया) एक सिविल इंजिनियर है| वो अपनी पत्नी आरती (अमृता खानविलकर), और दो बच्चों, रख्सा(अहसास चन्ना) और अंशुमन (केन्नी देसाई) के साथ एक वीरान से बंगले में रहता है| एक रात एक पार्टी में वो अपने कॉंट्रॅक्टर की पत्नी मधु (अश्विनी ख़ालसेकर) के अजीब व्यवहार की वजह से उसका तिरस्कार कर देता है और कॉंट्रॅक्टर को भी काम से निकल देता है| मधु बदला लेने क लिए काला जादू का प्रयोग राजीव के घर पर और उसके परिवार पर कर देती है| मधु का शिकार बनती है रक्षा, और उसे 'भूत बाधा' हो जाती है| जब डॉक्टरों को भी रक्षा के अजीब व्यवहार का कोई उचित कारण नही मिलता तो राजीव एक ओझा मुर्तज़ा कापसी (ज़ाकिर हूसेन) की मदद लेता है, और कहानी चरम की तरफ बढ़ती है|
बाल कलाकार रक्षा(एहसास चन्ना) और अंशुमन (केन्नी देसाई) का अभिनय जबरदस्त है| ख़ासकर एहसास चन्ना के 'भूत बाधा' के दृश्य किसी भी मँज़े हुए कलाकार के लिए प्रेरणास्रोत हो सकते है| अश्विनी ख़ालसेकर का किरदार डराने में सक्षम साबित हुआ है| पूरी फिल्म में एक मात्र नकारात्मक किरदार रहकर भी अश्विनी ख़ालसेकर ने ज़बरदस्त नकारात्मक चुनौती दी है| ज़ाकिर हूसेन का किरदार संक्षिप्त है परंतु फिल्म को अंजाम तक पहुँचने के लिए महत्वपुर्ण है और दर्शक उनके इस किरदार को पसंद करेंगे| संगीत के नाम पर सिर्फ़ पृष्ठभूमि स्कोर है जो सामान्य है| निर्देशन भी सामान्य है| कुल मिलाकर एक औसत पैसा वसूल फिल्म है 'फूँक'|
निर्देशक:राम गोपाल वर्मा
निर्माता:अजं खान
कलाकार:सुदीप,अमृता खानविलकर,एहसास चन्ना
संगीत:बापी-तुतुल
