इस हफ्ते 29 जुलाई को रिलीज़ होने जा रही फिल्म 'खाप' को बनाने का विचार निर्देशक और लेखक अजय सिन्हा को अख़बारों में ख़बरें देखकर आया था| फिल्म बनाने के लिए उन्होंने अपना एक फ़्लैट और ऑफिस तक बेच दिया| इरादा था ऑनर किलिंग की लगातार हो रही घटनाओं पर कुछ टिप्पणी करना| ओम पूरी इस फिल्म में एक ऐसे खाप सरपंच की भूमिका निभा रहे हैं जो पहले तो इस कुप्रथा का समर्थन करता है पर बाद में उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है| उन्होंने कहा, 'फिल्म के जरिये हमने तो ये अपील की है कि निर्दोष बच्चे-बच्चियां मारे जा रहे हैं और पुलिस, प्रशासन, राजनीतीज्ञ सब लोग चुप हैं| हमें कुछ करना चाहिए|'
ओम पूरी ने साफ़ तौर पर कहा कि ये एक सामाजिक फिल्म है राजनितिक नहीं| इसमें किसी तरह का कोई विवाद नहीं है| ग्रामीण हरियाणवी परिवेश कि वजह से फिल्म में गालियाँ होने की सम्भावना पर उन्होंने कहा, 'नहीं इसमें दिल्ली बेली जैसी कोई भाषा नहीं है|' अपने किरदार के लिए किसी ख़ास तैयारी के सवाल पर उन्होंने फ्लैशबैक में जाते हुए बताया, 'देखिये ज्यादातर किरदारों में कोई तैयारी नहीं लगती| पर कभी फिजिकली अलग दिखना होता है, करना होता है तो तैयारी करते हैं| मैंने श्याम बेनेगल की एक फिल्म में बहुत पहले एक बुनकर की भूमिका निभाई थी, तो उसके लिए मैंने बुनाई करनी सीखी थी| डेढ़ महीने में मैंने बहुत सारा कपडा भी बुन डाला था|' अजय इससे पहले टीवी के लिए 'हसरतें', 'अस्तित्व', 'जुस्तजू' और 'घर एक सपना' जैसे सीरियल बना चुके हैं| 2004 में उन्होंने 'स्टॉप' नाम से एक फिल्म का निर्देशन किया था|





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















