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आमिर खान (Aamir Khan)

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आमिर खान (Aamir Khan)
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जन्म तिथि: 14 मार्च,1965

जन्म नाम: आमिर खान

जन्म स्थान: मुंबई,इंडिया

कद: 5'5"

पहली फिल्म: होली

पहली सफल फिल्म: क़यामत से क़यामत तक

कंपनी: आमिर खान प्रोडक्शंस

'यादों की बारात' से बाल कलाकार के किरदार से आमिर ने फ़िल्मी दुनिया में अपना पहला कदम रखा| पर अपनी दूसरी फिल्म उन्होंने बड़े होने के बाद 'होली' की और फिल्म 'क़यामत से क़यामत तक' से वे दर्शकों के तारे बन गए और कभी पीछे मुड कर नहीं देखा| 90 के दशक से आज तक वे बॉलीवुड पर राज कर रहे है| आमिर-जूही चावला की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया| फिल्मों में अभिनय के बाद अब आमिर ने 'लगान से निर्माता का पद संभाला और 'तारे ज़मीन पर' से निर्देशक का और अपने हरफनमैला होने का परिमाण दिया|

करियर

आमिर खान ने अपने फ़िल्मी पेशे(करियर) की शुरुआत 1984  में फिल्म 'होली 'से की| हालांकि इससे पहले वे 1973 में नासिर हुसैन की फिल्म 'यादों की बारात'  में बाल कलाकार के रूप में अभिनय कर चुके थे| उन्हें अपनी पहली सफलता मिली मसूर खान की फिल्म 'क़यामत से क़यामत तक' से जिसके लिय उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ नावोनित अभिनेता का पुरस्कार भी मिला | उसके बाद उन्होंने फिल्म 'राख' में काम किया जिसमे उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला| उनकी अगली फिल्में 'दिल', 'दिल है कि मानता नहीं', 'जो जीता वही सिकंदर' और 'हम है राही प्यार के' दर्शकों को बेहद पसंद आई और उन्हें बॉलीवुड के शीर्ष और भरोसेमंद अभिनेताओं में ला खड़ा किया|  फिल्म 'हम है रही प्यार के' के लिय उन्होंने पहली बार खुद पटकथा लिखी| सलमान खान के साथ 'अंदाज़ अपना अपना ' से उन्होंने हास्य श्रेणी की फिल्मों के लिए एक मिसाल कायम कर दी और 15 साल भी इस फिल्म को बेहद चाव से देखा जाता है|

खान बॉलीवुड के उन चाँद अभिनेताओं में से है जो साल में एक या दो फिल्मों में काम करते है|  7 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए मनोनीत होने के बाद उन्हें अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार धर्मेश दर्शन की फिल्म 'राजा हिन्दुस्तानी' (1996)से मिला जिसमे वे एक टेक्सी चालक का किरदार निभाते है| अगले कुछ साल उनके लिय ज्यादा अच्छे नहीं रहे और  उन्होंने इश्क, गुलाम जैसी औसतन फिल्में की| उनकी अगली सफलता आई फिल्म सरफरोश से जिसमे उन्होंने एक देशभक्त और कठोर पुलिस अफसर का किरदार निभाया|

साल 2001 के बाद उनकी किस्मत चमकी और फिल्म ''लगान' से उन्होंने नए उच्चमान(रिकॉर्ड) कायम किये|  ये फिल्म न सिर्फ भारत में बेहद पसंद की गयी बल्कि विदेशों में भी इसने अच्छा कारोबार किया| इस फिल्म को ओस्कर के लिय शीर्ष 5 विदेशी फिल्मों में चुना गया| खुद खान को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ख़िताब मिला | "'लगान" के सफलता के बाद आई फरहान अख्तर की फिल्म 'दिल चाहता है' जो शहरी युवाओं को ध्यान में रखकर बनायीं गयी फिल्म थी| इस फिल्म में उन्होंने सैफ अली ख़ान और अक्षय खन्ना के साथ काम किया| फिल्म बेहद सफल रही और आज भी युवाओं के बीच एक लोकप्रिय फिल्म है| 

अपनी कमर के दर्द के चलते आमिर ने 4 साल तक फिल्मों से छुट्टी ले ली और 'मंगल पांडे' से वापसी की हालांकि फिल्म को कुछ ख़ास कामयाबी नहीं मिली| 2006 में राकेश मेहरा की फिल्म 'रंग दे बसंती' से उन्होंने जोरदार वापसी की और फिल्म दर्शकों के दिलों में घर कर गयी| न सिर्फ फिल्म में उनके किरदार और अभिनय की प्रशंसा हुई, बल्कि पटकथा और कहानी की वजह से भी  फिल्म युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय रही| 'रंग दे बसंती' को भारत की तरफ से ओस्कर के लिय भेजा गया हालांकि वहां फिल्म को चुना नहीं गया| पर फिल्म ने इंग्लैंड में बाफ्टा पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म का पुरस्कार जरुर जीता| आमिर को  फिल्मफेयर समीक्षक ख़िताब  से नवाजा गया | उनकी अगली फिल्म 'फना' भी दर्शकों ने काफी पसंद की|

2007 में उन्होंने निर्देशक की कुर्सी संभाली और अपने कुशल निर्देशन का परिमाण दिया फिल्म 'तारे ज़मीन पर' से| फिल्म की कहानी एक डिस्लेक्सिया से झूझ रहे बच्चे की कहानी है जिसने हर देखने वाले का दिल जीत लिया| न सिर्फ फिल्म उस साल की सफसे सफल फिल्म रही, उसने ढेरो ख़िताब भी जीते| ''लगान', 'रंग दे बसंती' और 'तारे ज़मीन पर' की सफलता के बाद आमिर एक अलग ही श्रेणी के अभिनेता जाने जाने लगे|  2008 में तमिल फिल्म की पुनर्कृति(रिमेक) 'गजनी'  भी उस साल की सबसे सफल फिल्म रही और आमिर का नया रूप दर्शकों को बेहद रास आया| 2009 में आई उनकी फिल्म '3 ईडियट्स'  ने नए उच्चमान(रिकॉर्ड) कायम किये और आमिर ने दर्शकों को एक और बेहद मनोरंजक फिल्म दी| इस फिल्म ने फिल्मफेयर के सभी पुरस्कार जीते और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया|

निर्माता

एक सफल अभिनय पेशे के बाद आमिर ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र  में कदम रखा और 2001 में आमिर खान प्रोडक्शंस कम्पनी की शुरुआत की| उनकी कम्पनी की पहली  फिल्म ''लगान' एक बेहद सफल फिल्म साबित हुई और ओस्कर में शीर्ष 5 विदेशी फिल्मों में  चुनी गयी| फिल्म ने ढेरो पुरस्कार जीते और राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज़ा गया| ओस्कर न मिल पाने पर आमिर को बेहद अफ़सोस हुआ और उन्होंने कहा, " हाँ, हम निराश जरुर हुए पर हमारे लिए सबसे बड़ी बात थी की पूरा देश हमारे साथ था| "

उनकी अगली फिल्म 2007 में आई "तारे ज़मीन पर" और इस फिल्म ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया| फिल्म में आमिर ने सह-कलाकार की भूमिका निभाई| फिल्म ने ढेरो पुरस्कार जीते और फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार भी मिला|

2008 में उन्होंने अगली फिल्म बनायीं "जाने तू या जाने ना"   जिसमे उन्होंने अपने भतीजे इमरान खान का  बॉलीवुड में दाखिला किया| ये फिल्म भी बेहद सफल रही और दर्शकों को खूब पसंद आई| उनकी अगली फिल्म 2010  में "पीपलि लाइव" रिलीज़ हुई जो गाँवों में किसानो की समस्याओं और मीडिया पर व्यंग थी| इस फिल्म को भी दर्शकों ने बड़े चाव से देखा| इस फिल्म को 2010 के लिय भारत की तरफ से ओस्कर में भेजा गया| ये आमिर की तीसरी फिल्म थी जो ओस्कर के लिय चुनी गयी|

निजी जिंदगी

खान एक फ़िल्मी परिवार से सम्बन्ध रखते है जहाँ उनके चाचा नासिर हुसैन ने उन्हें बॉलीवुड में एक सुनहरी फिल्म दी| खान के तीन भाई और है: फरहत खान, फैसल खान, निखत खान| खान की पहली शादी रीना दत्ता से 1986  में हुई| रीना ने फिल्म 'क़यामत से क़यामत तक' में छोटा किरदार भी निभाया था| रीना से आमिर के 2 बच्चे है: बेटा जुनैद और बेटी इरा| दिसम्बर 2002 में उन्होंने तलाक के लिय अर्जी दी और 15 साल चली शादी को ख़त्म कर दी| दोनों बच्चों की देख रेख का जिम्मा रीना को मिला| दिसम्बर 2005 में उन्होंने किरण राव से एक छोटे से समारोह में शादी की| किरण आमिर के साथ लगान पर सहायक निर्देशक के तौर पर  काम कर चुकी थी जिसके बाद दोनों में प्यार पनपने लगा|

हालांकि खान को ढेरो पुरस्कारों से मनोनीत किया गया है और ढेरों पुरस्कार भी मिले है पर आमिर फिल्मफेयर आदि पुरस्कारों में विश्वास नहीं रखते| उनका मानना है की इन पत्रिकाओं में विश्वसनीयता का अभाव है| खान को इंग्लैंड में मैडम तुस्सैड्स संग्राहलय में अपनी मोम की आकृति रखने का न्योता मिला जिसे आमिर ने ठुकरा दिया ये कहते हुए कि ये उनके लिय जरुरी नहीं है और अगर लोग उन्हें देखना  चाहेंगे तो उनकी फिल्में देखेंगे|

साल में सिर्फ एक फिल्म पर काम करने पर आमिर कहते है कि वे एक समय पर एक ही परियोजना संभाल सकते है और चाहते है कि जिस पर भी काम करे, वह बेहतरीन हो|

2009 के एक साक्षात्कार में  उन्होंने कहा की फिल्म निर्माण में ज्यादा विश्वास रखते है और न की फिल्म की सफलता पर| उनका मानना है की वे अलग अलग चीज़े करने के बजाय सामान्य चीजों को अलग ढंग से करते है| उन्हें महात्मा गाँधी और उनके विचारों से बहुत शक्ति मिलती है|



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