थाली भर कर ल्याई खीचड़ो
थाली भर कर ल्याई खीचड़ो, उपर घी की बाटकी ।
जीमो म्हारा श्याम धणी, जीमावे बेटी जाट की ।। टेर ।।
बाबो म्हारो दूर गयो है, ना जाने कद आवेलो,
उके भरोसे बैठ्यो रेवे तो, भूखो ही रह जावलो
आज जिमाऊँ तने खीचड़ो, काल राबडी छांछ की ।। जीमो ।।
बार बार मंदिर मे जाती, बार बार पट खोलती
कइयॉं कोनी जीमे मोहन, करड़ी -2 बोलती
थे जीमो जद मैं जीमुँला, मानु ना कोई लाटकी ।। जीमो ।।
पड़दोे भूल गई सॉंवरिया, पड़दो फेर लगायो है
धाबलिया की ओट बैठ कर, शाम खीचेड़ो खायो है
भोला भाला भक्तासुँ, सॉंवरिया कैसी आंट जी ।। जीमो ।।
भक्ति होतो करमा जैसी, सॉंवरियो घर आवलो
सोहनलाल लुहाकर प्रभु का, हरख-2 गुण गावेलो
सांची प्रीत हरी में हो तो, मूरत बोले काठ की ।। जीमो ।।





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















