तेरे जैसा राम भक्त
गायक - लखवीर सिंह लखहा
तेरे जैसा राम भक्त कोई हुआ न होगा मतवाला,
एक जरा सी बात पर तू ने सीना फाड़ दिखा डाला ।। टेर ।।
आज अवध की शोभा देखो स्वर्गलोक से भी न्यारी,
चौदह वर्ष बाद राम के राजतिलक की तैयारी ।
हनुमान के दिल ना पूछो झूम रहा है मतवाला ।। एक जरा ।।
जितने भूप अधीन अवध के सभी सभा में आए थे,
अपनी हैसियत से बढ कर के तोहफा लाये थे ।
लंकापति विभीषण ने भी हार दिया है इक आला ।। एक जरा ।।
रत्नजड़ित हीरों का हार जब लंकापति ने नजर किया,
राम ने समझा आभूषण है सीताजी की ओर किया ।
सीता ने हनुमान को दे दिया इसे पहन मेरे लाला ।। एक जरा ।।
हार हाथ में लेकर हनुमत घुमा फिरा कर देख रहे,
नहीं समझ में आया सबको तोड़ तोड़ कर फेंक रहे ।
लंकापति ने मन में सोंचा पड़ा है बन्दर से पाला ।। एक जरा ।।
लंकापति का धीरज टूटा क्रोध की भड़क उठी ज्वाला,
भरी सभा में बोल उठे तुम पागल हो अंजनी लाला ।
हार कीमती तोड़ दिया क्या वृक्ष का समझा फल आला ।। एक जरा ।।
जिसमें मेरे राम नहीं है वो माला मेरे काम की नहीं,
जिसमें मेरी सिया नहीं है वो माला मेरे काम की नहीं ।
भरी सभा में सीना फाड़ सिया राम का दर्श करा डाला ।। एक जरा ।।





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















