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हम है राही प्यार के (Hum Hain Rahi Pyar Ke Movie)

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हम है रही प्यार के

आमिर खान द्वारा अभिनीत हर फिल्म में कुछ न कुछ भिन्नता ज़रूर होती है और महेश भट्ट जैसे निर्देशक का साथ हो तो फिर तो क्या बात हो ! यह फिल्म 1993 की सफल फिल्मों एक है जिसमें आमिरख़ान और जूही चावला की कामयाब जोड़ी  तीसरी बार साथ नज़र आए| इस फिल्म के लिए जूही चावला ने फ़िल्मफ़ेयर के श्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार पर कब्जा जमाया था| साथ ही महेश भट्ट को भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अंतर्गत विशेष जूरी अवार्ड मिला| इस फिल्म के निर्माण के समय यह अटकलें लगती रही कि निर्देशन की बागडोर महेश भट्ट के बजाय आमिर ख़ान ने अपने हाथों में संभाल रखी  है |

इस फिल्म की कहानी का मुख्य पात्र राहुल मल्होत्रा (आमिर खान) है जो कर्ज़ से लदा हुआ परिवारिक व्यवसाय का सर्वेसर्वा है| राहुल के साथ उसकी मृत बहन के तीन शरारती बच्चे भी रहते हैं | राहुल बच्चों की देखभाल के लिए वैजयंती (जूही चावला) को नियुक्त करता है जो अपने घर से भागी हुई है कारण वह अपने पिता की पसंद के लड़के से शादी नहीं करना चाहती| धीरे धीरे वैजयंती राहुल से प्यार करने लगती है लेकिन राहुल एक संपन्न व्यावसायी बिजलानी (दिलीप तहिल) की बेटी माया (नवनीत निशान) से शादी को तैयार है| सगाई की रात बैजयंती और बच्चे भरी महफ़िल में तमाशा करते है जिससे सगाई नहीं हो पाती| घर आकर राहुल बैजयंती पर बरस पड़ता है,तभी उसे पता चलता है कि बैजयंती उसे प्यार करती है| राहुल माया को शादी के लिए इनकार कर देता है| गुस्से में बिजलानी राहुल को बर्बाद करने की योजना बनता है|

इस फिल्म में आमिर काफ़ी नपे तुले किरदार से बँधे हुए नज़र आए, उनका अभिनय हमेशा की तरह शानदार था लेकिन जूही चावला अधिक प्रभावित करती है | तमिल स्टायल में हिन्दी संवाद अदायगी दर्शकों को बार बार हँसने पर मजबूर करती है| जूही चावला की भूमिका उत्कृष्ट अभिनय के दम पर हास्य से सराबोर लगी |बाल कलाकारों के रूप में मास्टर कुणाल खेमू,शारूक और बेबी अशरफ ने मजेदार अभिनय किया |

इस फिल्म की कामयाबी के पीछे संगीत का बड़ा योगदान है| नदीम श्रवण का संगीत उत्कृष्ट स्तर का था जिसने बहुत समय तक दर्शकों की पसंद पर राज किया| "घूँघट की आड़ से", "वो मेरी नींद" और "मुझसे मुहब्बत का इकरार करता"- ये ऐसे गाने हैं जिसकी मधुरता में अभी तक कोई कमी नहीं आई है|

आमतौर पर फिल्मों में समाप्ति से पहले खलनायकों की बुरी तरह पिटाई करने का रिवाज है लेकिन इस फिल्म में खलनायकों की पिटाई अंडे फेक कर की जाती है, इसी से फिल्म के हल्के फुल्के और मनोरंजनपूर्ण होने का पता चलता है|

जिन्हे हल्की फुल्की फिल्में देखना पसंद है ,यह फिल्म उन्हीं के लिए है क्योंकि फ़ीलगुड परिवारिक मनोरंजन के साथ साथ कर्णप्रिय गीत संगीत और चुटीले हास्य इसे एक मजेदार फिल्म बनाते हैं |

अंक : ***


 

निर्देशक: महेश भट्ट
निर्माता: ताहिर हुसैन
लेखक: रोबिन भट्ट, आमिर खान
कलाकार: आमिर खान, जूही चावला
संगीत: नदीम-श्रवण
फिल्म रिलीज़: 23 जुलाई,1993


 

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