यश चोपरा निर्देशित दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे हिन्दी सिनिमा के इतिहास मे सबसे सफलतम फिल्मों मे से एक है| बहुत कम ही ऐसा होता है की कोई फिल्म दर्शको को बहुत लंबे समय तक बाँधे रखती है और सिनिमा को एक नयी दिशा मे ले जाती है| इस फिल्म ने हिन्दी सिनिमा को एक नया आयाम दिया और आलम ये है क़ी 750 हफ्तों के बाद भी ये मुंबई के सिनिमा हॉल मे लगी हुई है जो की अपने आप में एक इतिहास है|
इस फिल्म ने शाहरुख़ खान और काजोल देवगन की जोड़ी को दर्शको की मनपसंद जोड़ी बना दी जिसने 'करण-अर्जुन','कुछ कुछ होता है' जैसी बड़ी फ़िल्मे दी| फिल्म दिखाती है की विदेश मे पले बड़े होने के बावजूद लोग अपने संस्कार और मान-मर्यादा की कद्र करते है|
कहानी: चौधरी बलदेव सिंग(अमरीश पूरी) ब्रिटिश आप्रवासी है| वह अपनी बीवी लाजवंती(फ़रीदा जलाल) और दो बेटियाँ, सिमरन(काजोल देवगन) और चुटकी(पूजा रूपरेल) के साथ लंदन मे रहते है| इतने साल लंदन मे रहने के बावजूद वे भारतीय संस्कृति और संस्कार में विश्वास रखते है और अपने बच्चों को भी वही तालीम देते है| उनका मानना है की वह सिर्फ़ पैसा कमाने के लिए लंदन मे है और एक दिन वापस अपने देश पंजाब लौट जाएँगे|
सिमरन अपने सपनो के राजकुमार का इंतेज़ार करती है| पर उसे पता चलता है की उसकी शादी बचपन मे ही बलदेव के दोस्त के बेटे कुलजीत के साथ तय हो गयी थी| शादी से पहले वह अपने दोस्तो के साथ एक बार अपनी जिंदगी जीना चाहती है| बलदेव सिंग उसे युरोप घूमने की इज़ाज़त दे देते है इस शर्त पर की वह कभी अपने पिता का कहा नही टालेगी|
राज(शाहरुख़ खान) आप्रवासी भारतीय धरमवीर मल्होत्रा(अनुपम खेर) का बिगड़ा हुआ रईस बेटा है जो पढ़ाई मे फेल हो जाता है| उसकी और धरमवीर मे बाप-बेटे की जगह दोस्ती का रिश्ता है| राज भी अपने दोस्तों के साथ युरोप घूमने निकल पड़ता है| ट्रेन मे उसकी मुलाक़ात सिमरन से होती है और दौरा ख़त्म होते होते बहुत नौंक-झौंक के बाद उन्हे प्यार का एहसास होता है| सिमरन वापस आकर अपनी माँ को सब बात बताती है जिसे बलदेव सिंग सुन लेते है| गुस्से मे आकर बलदेव सिंग पंजाब जाने की तैयारी करते है| वही दूसरी ओर धरमवीर राज को सिमरन को लाने के लिए समझाते है| फिल्म का दूसरा भाग भारत मे है जहाँ कुलजीत और उसका परिवार शादी की तैयारियाँ कर रहा है| राज भारत आकर कुलजीत और उसके परिवार के साथ दोस्ती करता है| वह सिमरन को भागने के बजाए उसके पिता की मंज़ूरी के साथ ले जाना चाहता है| फिर शुरू होती है राज की सिमरन को दुल्हन बना कर ले जाने की कवायद|
फिल्म विदेशी प्रभाव और भारतीय संस्कृति के बीच मे संतुलन का संदेश देती है| जहाँ एक तरह राज और सिमरन विदेश मे पले बड़े है वही दूसरी तरफ राज सिमरन को भागने से माना कर देता है और बड़ों के आशीर्वाद और मंज़ूरी से ही सिमरन से शादी करना चाहता है| फिल्म की पटकथा दर्शकों को बाँधे रखती है और फिल्म के गीत कहानी मे नया अंदाज़ पेश करते है| फिल्म के गाने दर्शकों को बेहद पसंद आए है और हर गीत एक छाप छोड़ जाता है| "घर आजा परदेसी" जहाँ आप्रवासी भारतीय को वापस बुलाती है वही "मेरे ख्वाबों" सिमरन के सपनो के राजकुमार का वर्णन करता है| "हो गया है तुझको तो प्यार सजना" सिमरन और राज के अज्ञात प्यार की भावनाए दर्शाती है| गीतों के बोल और लताजी की आवाज़ ने गानो को आज के दर्शको मे भी लोकप्रिय कर दिया है| फिल्म के संवाद "बड़े बड़े देशो मे छोटी छोटी बातें तो होती रहती है" ने दर्शकों का दिल जीत लिया|
गीत:
| ना जाने मेरे | ज़रा सा झूम लू | तुझे देखा तो | रुक जा ओ दिल दीवाने | ना जाने मेरे |
निर्देशक: आदित्य चोपरा
निर्माता: यश चोपरा
कलाकार : शाहरुख़ खान,काजोल देवगन, अमरीश पूरी, अनुपम खेर ,सतीश शाह,पूजा रूपरेल, मंदिरा बेदी
संगीत: जतिन-ललित
