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राम तेरी गंगा मैली (Ram Teri Ganga Maili Movie)

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राम तेरी गंगा मैली

महान फिल्मी हस्ती राजकपूर द्वारा निर्देशित राम तेरी गंगा मैली उनकी आखरी फिल्म थी,जो 1985की सुपरहिट फिल्मों में से एक है | यह क्लासिक फिल्म गीत संगीत,निर्देशन एवं दृश्यांकन-हर लिहाज से क्लासिक थी|

कहानी का मुख्य पात्र है नरेंद्र, जो कोलकाता से अपने कालेज ग्रुप के साथ गंगा नदी के उदगम श्रोत पर शोध करने के लिए गंगोत्री आता है|

वहाँ वह एक पहाड़ी लड़की गंगा से प्रेम कर बैठता है, शादी भी हो जाती है| फिर अन्य पारंपरिक फिल्मों की तरह वापस आने का वादा करके काम के सिलसिले में वो कोलकाता लौट जाता है| महीनों गुजर जाते हैं लेकिन पारिवारिक उलझनों में फंसकर वो गंगोत्री नहीं जा पाता | इधर गंगा उसके बच्चे की माँ बन जाती है| इसके बाद गंगा नरेंद्र को ढूँढने गंगोत्री से कोलकाता निकल पड़ती है,पवित्र नदी गंगा के भी बहने का यही रास्ता है| इसके बाद छल-कपट की इस दुनिया में भोली भली गंगा का दामन बार बार दागदार होता हैऔर कोलकाता पहुँचने तक किन परिस्थितियों का सामना करती है गंगा, इस फिल्म में बेहद संवेदनशीलता के साथ पवित्र नदी गंगा और पात्र को एक साथ  समायोजित किया गया|

लगभग तीन दशक पहले की इस फिल्म की रिलीज़ के साथ ही इसके बोल्ड दृश्यों को लेकर सनसनी फैल गई थी | हालाँकि एक सार्थक मुद्दे पर आधारित कहानी में वैसे बोल्ड दृश्यों की कोई आवश्यकता नहीं थी पर इस मामले में राजकपूर एक अच्छे व्यावसायी भी थे| उन्होने इस फिल्म में बोल्ड दृश्य को साथ  रखकर अश्लीलता का विरोध किया|  इस कारण दर्शकों के एक विशेष वर्ग द्वारा इस फिल्म को देखने का मुख्य उद्देश्य गौण हो गया |

फिल्म की पटकथा बेहतरीन थी और राजकपूर की सभी फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी गीत-संगीत ने निराश नहीं किया| राजकपूर और संगीतकार रवीन्द्र जैन ने पहली बार साथ काम किया था जो यादगार साथ रहा | अभिनय की बात करें तो इस फिल्म से मंदाकिनी के कैरियर का श्री गणेश हुआ था लेकिन वो भी ‘वन फिल्म्स वॉंडर’बनकर रह गई| मंदाकिनी और राजीव कपूर का अभिनय औसत रहा | सईद जाफ़री,कुलभूषण खरबंदा,रज़ा मुराद और सुषमा श्रेष्ठ सरीखे सहायक कलाकारों के बेहतरीन अभिनय ने इस फिल्म को मजबूती प्रदान की| लाजवाब दृश्यांकन इस फिल्म की आत्मा है| फिल्म की लोकप्रियता और सफलता का अंदाज़ा इसी बात से लगता है कि  1986 के फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों की 5 श्रेणियों के लिए इस फिल्म को नामित किया गया था-निर्देशन, कला निर्देशन,संपादन,श्रेष्ठ फिल्म एवं श्रेष्ठ संगीत|

प्रेमरोग तक राजकपूर के निर्देशन में विशिष्ट शिल्पकारी के दर्शन हुए थे लेकिन इस फिल्म के निर्माण के बाद राजकपूरको फिल्म इंडस्ट्री का शॉमेन कहा जाने लगा|

राम तेरी गंगा मैली एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसमें सामाजिक विषमताओं पर आघात करते हुए निर्देशक महोदय ने भारतीय संस्कृति में व्याप्त दोहरे मापदंडो को उजागर करने के लिए पतित-पावणी गंगा को आधार बनाया|

निर्देशक: राज कपूर
निर्माता: राज कपूर
लेखक: राज कपूर
कलाकार: राजीव कपूर, मन्दाकिनी, दिव्या राना , सईद जाफरी
संगीत: रविन्द्र जैन
फिल्म रिलीज़: 25 जुलाई, 1985

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