राम लखन सुभाष घई की उस दौर की फिल्म है जब वो फिल्मोद्योग में शोमेन के नाम से खुद को स्थापित कर चुके थे| यह सुभाष घई की बेहतरीन फिल्मों में से एक है जो उनके जाने माने फ़ॉर्मूले पर आधारित था, यानि पहले अच्छाई पर बुराई और अंततः बुराई पर अच्छाई की जीत | फिल्म का मजबूत तकनीकी एवं लेखन पक्ष इसे दर्शकों की एक चहेती फिल्म बना गये थे |
कहानी: संपत्ति की लालच में ठाकुर प्रताप सिंह (दिलीप ताहिल) की हत्या उसके दुष्ट भतीजे विश्वंभरनाथ (अमरीश पूरी) और भानु (परेश रावल) मिलकर कर देते हैं और ठाकुर की विधवा शारदा (राखी गुलज़ार) और उसके दो छोटे बच्चों को हवेली से बाहर निकल देता है| दर दर की ठोकरे खाती शारदा विश्वंभरनाथ से बदला लेने की शपथ लेती है और मुश्किल हालातों के साथ अपने दोनों बच्चे राम और लखन के लालन पालन में जुट जाती है |
बड़ा होकर राम (जॅकी श्रॉफ्फ) एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर बन जाता है और लखन (अनिल कपूर) रातों रात अमीर होने के सपने बुनता गली का टपोरी बन जाता है,जिसकी प्रेमिका है राधा (माधुरी दीक्षित) | एक बार इनाम पाने की लालच में लखन कुख्यात अपराधी केसरिया विलायती (गुलशन ग्रोवर) को पकड़वा देता है और इनाम के तौर पर उसे पुलिस इंस्पेक्टर की नौकरी मिल जाती है|
अपने दोनों बच्चों को अच्छे मुकाम पर देखकर शारदा तीर्थ यात्रा पर निकल जाती है| इधर लखन पैसों की लालच में विश्वंभरनाथ के साथ मिलकर काफ़ी दौलत बटोर लेता है| जब शारदा तीर्थ से वापस लौटती है तो अपने दोनों बच्चों को दो अलग रास्तों पर देखकर सदमें में पड़ जाती है| क्या शारदा का बदला पूरा हो पाता है ?
फिल्म का हरेक पात्र बेहद स्वाभाविक एवं ज़मीन से जुड़ा लगता है| इस फिल्म के कुछ दृश्य जो बेहद प्रभावित करते हैं-
- अपनी माँ को हवेली से खींचकर बाहर लाए जाने का दृश्य, जो लखन को याद आती है |
- वह दृश्य जब लखन राम पर अपनी दौलत से जलने का इल्ज़ाम लगता है |
- लखन के आलीशान घर में जब शारदा गुस्से से पागल होकर सारे फर्नीचरों को तोड़ डालती है|
- फिल्म का अंतिम दृश्य जब रेल की पटरियों पर शारदा, राम और लखन मिलकर विश्वंभर से अपना इन्तेक़ाम लेते हैं|
राम लखन की कहानी पूरी तरह बॉलीवुड की मसाला फिल्मों की तरह है जिसमें ड्रामा, एक्शन और हास्य का भरपूर तड़का है|राम केलकर की सशक्त पटकथा इसकी एक ख़ासियत है जिसमें अनवर ख़ान के संवाद फिल्म के हर मूड को अच्छी तरह पेश करते हैं| जहाँ अनुपम खेर, सतीश कौशिक एवं अनिल कपूर के बीच के संवाद हँसाते हैं वहीं राखी के संवाद दृश्यों में काफ़ी गंभीरता ला देते हैं| साथ ही, अशोक मेहता का बेहतरीन छायांकन अपने पूरे प्रभाव में दिखता है |
संगीत: इस फिल्म की सफलता के पीछे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का संगीत एक मजबूत पक्ष रहा | एक गाना 'मेरे दो अनमोल रतन' पूरी फिल्म में कई जगह टुकड़ों में इस्तेमाल की गई| दूसरा गाना 'वन टू का फोर' पर गली गली के टपोरी फिदा थे | एक गाना 'तेरा नाम लिया' कर्णप्रिय हैं वहीं ओ रामजी एवं बेकदर गानों में सरोज ख़ान के निर्देशन में माधुरी दीक्षित का नृत्य गानों को बेहद खूबसूरत बना गया |
अभिनय की बात करें तो राखी गुलज़ार का शोक संतप्त एवं बदले में आग में तपता किरदार इस फिल्म की जान थी| इस भूमिका ने उन्हें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी दिलाया | जैकी श्रॉफ़ राम की भूमिका को एक आदर्श रूप देने में सक्षम रहे वहीं अनिल कपूर की भूमिका में काफ़ी रंग थे, जिसके साथ उन्होने पूरा इंसाफ़ किया|
अभिनेत्रियों में माधुरी दीक्षित की अदायगी एवं नृत्य- दोनों ही बेहतरीन थे वहीं डिंपल कपाड़िया अपनी भूमिका के हिसाब से थी | खलनायकी के खास अंदाज़ के साथ अमरीश पूरी पूरे फिल्म में प्रभावी रहे | शेष, अनुपम खेर व सतीश कौशिक समय समय पर हास्य का डोज देते रहे |
कुल मिलाकर, फिल्म राम लखन एक संपूर्ण मनोरंजक फिल्मों की श्रेणी में अपने विशेष मुकाम पर आज भी है |
| निर्देशक | सुभाष घई |
| निर्माता | सुभाष घई |
| कहानी | सुभाष घई |
| संगीत | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल |
| कलाकार | अनिल कपूर,माधुरी दीक्षित, जॅकी श्रॉफ्फ,डिंपल कपाड़िया,राखी गुलज़ार,अमरीश पूरी |
| फिल्म रिलीज़ | 27 जनवरी,1989 |
