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रोटी कपडा और मकान (Roti Kapda Aur Makaan Movie)

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रोटी कपडा और मकान

देश प्रेम या देश व समाज की समस्याओं को केंद्र में रख कर फिल्म बनाने वाले मनोज कुमार ऩे जहाँ देश भक्ति पर "उपकार", प्रवासी भारतीयों पर "पूरब और पश्चिम" जैसी श्रेष्ठ फिल्मों का निर्माण किया, वही जिन्दगी की मूलभूत आवश्यकताएं - भूख, कपडा और मकान, की तलाश में किस प्रकार दर दर भटकता है उसे प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है अपनी फिल्म "रोटी, कपडा और मकान" में|

 भारत  (मनोज कुमार) एक सुशिक्षित युवा है, और ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण परिवार का भार भारत के कन्धों पर है,परन्तु देश की प्रमुख समस्या बेरोजगारी के कारण उसको नौकरी के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है| छोटे भाई विजय (अमिताभ बच्चन), दीपक  (धीरज कुमार), बहन(मीना टी) तथा इन सबके लिए चिंताग्रस्त माँ और पिता का उत्तरदायित्व भारत को ही वहन करना है| उसकी प्रेमिका शीतल (जीनत अमान) है,जो भारत के आदर्शों व ईमानदारी से प्रभावित है, उसे प्यार भी करती है, परन्तु अभाव में जीना उसको स्वीकार नहीं|

पैसा कमाने की होड़ में विजय घर छोड़कर चला जाता है ये कहकर कि अब वो घर तभी वापस लौटेगा जब कुछ करके आत्मनिर्भर हो जायेगा| इसी बीच शीतल को काम मिल जाता है,जहाँ  धन और वैभव की चाह में वह अपने बॉस मोहन बाबू  (शशि  कपूर) को पसंद करने लगती है, जो एक प्रभावशाली और धनवान व्यक्ति है|

भारत को भी नौकरी मिलती है पर इस बीच शीतल मोहन बाबू द्वारा रखा गया विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है| वही भारत की भेंट तुलसी (मौसमी चटर्जी) से होती है जो किसी दुराचार का शिकार हो कर अपने लड़के को निर्धनता में पाल रही है| परिस्तिथियों के चलते भारत की नौकरी भी छूट जाती है और वह पुनः बेरोजगार हो जाता है|

भ्रष्टाचारी नेकी राम(मदन पुरी) अपने काले धंधों में काम कराके भारत को धनवान बनने का लालच देता है| पर हर तरफ से ठोकरे और निराशा झेल रहा भारत क्या इस ग़लत रास्ते को चुनेगा?

निर्देशक मनोज कुमार की यह फिल्म आम समस्याओं पर आधारित है| अपनी पूर्ववर्ती फिल्मों की भांति यहाँ भी उसका चरित्र एक आदर्श भारतीय का है, जिससे सभी प्रभावित हैं| अमिताभ बच्चन जो एक आर्मी अफ़सर की भूमिका निभाता है, अपने छोटे से रोल में भी प्रभावशाली है| शीतल अपनी भूमिका में आकर्षक लगी है, शशि कपूर भी जंचें हैं| विलेन के रूप में मदन पुरी अपनी भूमिका से न्याय कर सके हैं  मौसमी का अभिनय संवेदनशील तथा प्रभावी है| शेष सभी पात्र अपने चरित्र में सामान्य हैं|

 फिल्म का संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल का है| फिल्म के कुछ गीत बहुत लोकप्रिय हुए हैं

                 "हाय हाय ये मजबूरी"  लता मंगेशकर

                  "मैं न भूलूंगा"            लता मंगेशकर,मुकेश|

                  "और नहीं बस और नहीं" महेंद्र कपूर

                  "महंगाई मार गयी"         लता,मुकेश,नरेंद्र चंचल एवं जोनी बाबू

                  "पंडित जी मेरे मरने के बाद"  लता मंगेशकर

फिल्म बहुत सारे पुरस्कारों के लिए नामांकित हुई ,जिनमे प्रमुख हैं:

1975 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता मनोज कुमार, सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता प्रेम नाथ, सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री के लिए मौसमी, सर्वश्रेष्ठ संगीत के लिए लक्ष्मी कान्त प्यारे लाल |

फिल्म को कुछ पुरस्कार प्राप्त भी हुए जो इस प्रकार थे:

                     सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्देशक : मनोज कुमार

                     सर्वश्रेष्ठ गीत : संतोष आनंद ("और नहीं बस और नहीं")

                     सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक मुकेश : "मै न भूलूंगा "

 फिल्म के कुछ दृश्य स्मरणीय रहे हैं जैसे मौसमी के बच्चे का सीवर में गिरने पर उसका संवेदनशील अभिनय प्रशंसनीय है| ‘मै न भूलूंगा’ गीत दो बार फिल्माया गया और दोनों विपरीत परिस्तिथियों में अच्छा लगता है| मनोजं कुमार की देश से सम्बंधित फिल्मों की श्रृखला में यह फिल्म आज भी याद की जाती है|

अंक: ***1/2


निर्देशक: मनोज कुमार
निर्माता: मनोज कुमार
लेखक: मनोज कुमार
कलाकार: मनोज कुमार, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, जीनत अमान, मौसमी चेटर्जी
संगीत: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
फिल्म रिलीज़: 1974

 

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