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पूरब और पश्चिम (Purab Aur Paschim Movie)

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ख़राबश्रेष्ठ 

देश प्रेम की भावना  को फिल्मों में मूर्त रूप प्रदान करने के लिए मनोज कुमार का भारतीय सिनेमा जगत में प्रमुख स्थान रहा है| उपकार जैसी श्रेष्ठ फिल्म के सफल होने के पश्चात  फिल्म "पूरब और पश्चिम" में थोड़े नए रंग में उन्होंने न केवल पूर्व अर्थात भारत व पश्चिम अर्थात पाश्चात्य देशों के मूल्यों को तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत किया अपितु भारतीय सभ्यता व संस्कृति का सुंदर रूप में फिल्मांकन किया| अपने ही देश को भूल कर विदेशी सभ्यता व संस्कृति के रंग में रंगे तथा स्वदेश को तिरस्कार की भावना से देखने वाले अप्रवासी भारतीयों की कहानी को मनोज कुमार ने फिल्म के रूप में प्रस्तुत कर एक सन्देश देने का प्रयास किया है|

 स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व की कहानी में अंग्रेजों से पुरूस्कार प्राप्त करने की अभिलाषा में हरनाम (प्राण) ओम नामक स्वंत्रता संग्राम सेनानी,जो भारत के पिता हैं, को धोखे  से प्राणांत करवा देता है ओम का पुत्र भारत बड़ा हो कर अध्ययन के लिए लन्दन जाता है,परन्तु उसके देशप्रेमी ह्रदय को ये देखकर बहुत दुःख होता है कि वहां बसे भारतीयों के हृदय में अपने देश के प्रति कोई मोह नहीं है| उनके हृदय परिवर्तन को अपना लक्ष्य बनाता है| लन्दन में वह अपने पिता के मित्र शर्माजी के परिवार के साथ रहता है|उनकी बेटी प्रीती (सायरा बानो) पूरी तरह से पाश्चात्य रंग में रंगी हुई है,सिगरेट,शराब पीना उसका शौक है|प्रीती भारत नायक के मूल्यों को अच्छा तो मानती है परन्तु विदेशी धरती को छोड़ना नहीं चाहती| भारत से शादी करने के पीछे उसकी यही शर्त है कि वह भारत नहीं जायेगी| भारत उसके सामने एक प्रस्ताव रखता है कि उसको एक बार भारत चलना होगा प्रीती उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है, तथा भारत आती है| पर क्या भारत को अपना सकेगी प्रीती? निर्देशक तथा नायक मनोज कुमार अपने उद्देश्य में कहाँ तक सफल हो पायेंगे? इस प्रकार कुछ खलनायकी घटनाओं जिनमें ओ पी (प्रेम चोपड़ा) द्वारा प्रीती के साथ बलात्कार का प्रयास,भारत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास,"हरे राम हरे कृष्णा" के नशे में चूर अनुयायी तथा धोखे में रखकर पत्नी बच्चे  के होते  दूसरी लड़कियों को जाल में फंसाना आदि घटनाएँ दिखाई गयी हैं|

फिल्म उद्देश्परक तो है ही,अभिनय भी कलाकारों का सराहनीय है| मनोजकुमार का तो यह पसंदीदा किरदार है| माँ के रूप में कामिनी कौशल का अभिनय सदा की तरह बहुत अच्छा है,पाश्चात्य रंग में रंगी सायरा बानो अपने रोल में सुंदर लगती हैं| प्राण,प्रेम चोपड़ा खलनायक के रूप में जमते हैं| अशोक कुमार,राजिन्द्र नाथ तो अभिनय में कुशल है ही| फिल्म में नायक से ये पूछा जाना कि लोग भारत में शिक्षा लेने आते थे और अब नायक का अध्ययन के लिए विदेश जाना और इसका उत्तर निर्देशक की व्यवहारिक सोच को दर्शाता है,जिसके अनुसार ज्ञान कहीं  से भी लेना तर्कसंगत है| 

फिल्म के अधिकतर गाने हिट रहे हैं तथा देशप्रेम व भारतीय संस्कृति को ध्यान में रख कर लिखे गए है| प्रमुख गीत हैं:

"दुल्हन चली पहन चली तीन रंग की" -  महिंद्र कपूर|

"कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे"         -  मुकेश

( आरती ) ओम जय जगदीश"           -  महिंद्र कपूर,ब्रजभूषन,श्याम 

"पूर्वा सुहानी आई रे"                         -  महिंद्र कपूर ,मनहर उदास|

"राम धुन रघुपति"                            -  महिंद्र कपूर,मनहर उदास

 " भारत का रहने वाला हूँ "                -  महिंद्र कपूर

 "ट्विंकल ट्विंकल "                         -  महिंद्र कपूर आशा भोंसले 

 फिल्म में भारतीय मेले का दृश्य बहुत अच्छी तरह फिल्माया गया है| इसी प्रकार हिप्पियों के जीवन की दुर्दशा का चित्रण करने में लेखक,निर्देशक, निर्माता सफल रहे हैं |स्वदेश के मूल्यों का समझाने का लेखक का प्रयास प्रशंसनीय है|

फिल्म में कुछ दृश्यों की पुनरावृत्ति लगती है,जैसे क्लब लाईफ के कुछ दृश्य| एक दो स्थानों पर नाटकीयता भी झलकती है| परन्तु मनोज कुमार अपना मंतव्य दर्शकों के समक्ष सफलता पूर्वक रखने में सफल रहें हैं| देश प्रेम प्रधान होते हुए भी फिल्म दर्शकों को मनोरंजन देने में सफल रही है|

रोचक बातें:

1) कामिनी कौशल मनोज कुमार की माँ के रूप में सदा  प्रथम पसंद रही हैं

2) कहानी के लिखने में मनोज कुमार की पत्नी शशि गोस्वामी |का योगदान रहा है|

3) "नमस्ते लन्दन " फिल्म के निर्माण में इस फिल्म की स्पष्ट छाप दिखती है|

4) देश भक्ति प्रधान फिल्मों की श्रेणी में इसके बाद मनोज कुमार ने सफलता पूर्वक "रोटी कपडा मकान" तथा "क्रान्ति" का निर्माण किया|

अंक: ***1/2


निर्देशक: मनोज कुमार
निर्माता: मनोज कुमार
लेखक: शशि गोस्वामी, मनोज कुमार
कलाकार: मनोज कुमार, सायरा बानो,
संगीत: कल्यानजी-आनंदजी
फिल्म रिलीज़: 1970

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