1965 ई. में बनी यह महान फिल्म विजय आनंद द्वारा निर्देशित थी| यहफिल्म आर.के. नारायण की प्रसिद्ध उपन्यास 'द गाइड" पर आधारित थी| इस फिल्म के कलाकारों का अभिनय, विजय आनंद की पटकथा एवं निर्देशन और सचिन देव वर्मन का संगीत-ये तीनों पक्ष इस फिल्म को मिल का पत्थर बनाने में मुख्य वजह बने | यही कारण है कि रिलीज़ के 42 वर्षों बाद भी यह फिल्म 2007 के कान्स फिल्म समारोह में दिखाई गई|
कहानी राजू (देव आनंद) के जेल से रिहा होने के साथ शुरू होती है| इसके बाद फ्लेश बेक चलता है| राजू एक ऐतिहासिक स्थल पर गाईड है| वहाँ एक प्रौढ़ पुरातत्वविद मार्को(किशोर साहू) अपनी युवा पत्नी रोज़ी (वहीदा रहमान) के साथ अपने शोध के सिलसिले में आता है| वहाँ मार्को गुफ़ाओं पर शोधकार्य में व्यस्त हो जाता है| उधर राजू रोज़ी को ऐतिहासिक स्थलों के दौरे पर ले जाता है | इस दौरान राजू को रोज़ी के पृष्ठभूमि और मार्को के नाइंसाफियों के बारे में पता चलता है | नृत्य रोज़ी का जुनून है पर मार्को इसकी अनुमति नही देता | पति-पत्नी के बीच तनावों के कारण रोज़ी आत्महत्या कीकोशिश करती है| राजू रोज़ी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए जीने की प्रेरणा देता है| परिणाम,रोज़ी मार्को के साथ अपने रिश्ते ख़त्म कर राजू के घर रहने आ जाती है|रोज़ी का कैरियर बनाने में राजू जी जान से उसकी मदद करता है| रोज़ी कामयाब हो जाती है पर मार्को की साजिश के कारण दोनों के रिश्तों में खटास आ जाती है और जालसाजी के आरोप में राजू को जेल हो जाती है| जेल से बाहर निकलने के बाद राजू की जिंदगी ही बदल जाती है|
फिल्म का अंत दुखद है| यह फिल्म संदेश देती है कि एक अपराधी भी जिंदगी को दूसरे नज़रिए से देख सकता है और किसी इंसान की गुज़री जिंदगी उसके वर्तमान पर हावी नहीं हो सकती |
इस फिल्म को इंडो-अमेरिकी फिल्म निर्माण के अंतर्गत हिन्दी और अँग्रेज़ी भाषाओं में एक साथ शूट करने की योजना थी पर दोनों निर्माता टीम के बीच मतभेद होने के कारण देव आनंद को हिन्दी संस्करण स्थगित करना पड़ा था| बाद में विजय आनंद को अवसर मिला और यह फिल्म मील का पत्थर साबित हुई|
इस फिल्म में शैलेंद्र के गीत और एस. डी. बर्मन का संगीत-दोनों बेहतरीन स्तर के थे | इसके साउंड ट्रेक्स प्लॅनेट बॉलीवुड द्वारा 100महानतम बॉलीवुड साउंड ट्रेक्स में नं. 11पर सूचीबद्ध की गई | श्रेष्ठ फिल्म, निर्देशन, अभिनेता व अभिनेत्री-गाईड फिल्म को इन चारों श्रेणियों के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था |
अमुनन फिल्में पैसा बरसाने का माध्यम मानी जाती हैं लेकिन कुछ फिल्मकार कला के उत्थान के लिए फिल्में बनाते हैं| ऐसी फिल्में हमारे उतार-चढ़ाव भरी जिंदगी में कुछ पलों के लिए ही सही,पर ठहराव ला देते हैं| गाईड एक ऐसी ही फिल्म है जिसमें प्रेम, रोमांस, धोखा और त्याग- सभी कुछ है| देव आनंद और वहीदा रहमान का यादगार अभिनय, बेहतरीन गीत-संगीत के साथ साथ इस फिल्म का दार्शनिक पहलू भी दर्शकों को बेहद प्रभावित करती है | गाईड आम इंसान को अपनी क्षमताओं की खोज एवं उसका सदुपयोग करने की सीख देती है|
अंक : *****
| निर्देशन: | विजय आनंद |
| निर्माता: | देव आनंद |
| कलाकार: |
देव आनंद, वहीदा रहमान, किशोर साहू,लीला चिटनिस |
| लेखक: | आर. के. नारायण (उपन्यास) |
| संगीत: | एस.डी.बर्मन |
| फिल्म रिलीज़: | 6 फ़रवरी 1965 |
