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50 दशक

नया दौर (Naya Daur Movie)

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नया दौरबी आर चोपड़ा हिंदी फिल्म जगत के उन महान निर्देशकों में से हैं जिन्होंने मनोरंजन को हमेशा वर्तमान की समस्या से जोड़ के समाज के लिए एक सन्देश और समस्या का हल देने का प्रयास किया है| नया दौर फिल्म भी इस श्रंखला की एक कड़ी है और अपने उद्देश्य में पूर्णतया सफल होती है|

वैसे तो 50 साल पहले बनी एक एतिहासिक फिल्म की आज समीक्षा करना बहुत मुश्किल है, लेकिन इस फिल्म की यही सबसे बड़ी खासियत है कि दौर कोई भी हो ये फिल्म नयी ही लगेगी|

चलती का नाम गाड़ी (Chalti Ka Naam Gaadi Movie)

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चलती का नाम गाड़ी

इस फिल्म का निर्देशन सत्यन बोस ने किया था और फिल्म के मुख्य कलाकार थे किशोर कुमार, अशोक कुमार, मधुबाला | फिल्म 1958 में रिलीस हुई थी| इस फिल्म का संगीत एस.डी.बर्मन ने दिया है|

बृजमोहन, जगमोहन और मनमोहन शर्मा ब्रदर्स हैं जिसमे से जगमोहन इंजिनियर और मनमोहन मेकैनिक है| तीनों भाई 'मोहन ब्रदर्स' नाम से एक गैरेज चलाते हैं| बृजमोहन कामिनी को चाहता था  लेकिन कामिनी किसी  और से शादी करना  चाहती थी|

बाबुल (Baabul Movie)

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इस फिल्म का निदेशन नौशाद ने किया था और फिल्म के मुख्य कलाकार थे दिलीप कुमार, नरगिस और मुनावर सुल्ताना. फिल्म 1950 में रिलीस हुई थी.

मदर इण्डिया (Mother India Movie)

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मदर इण्डियावास्तविक जीवन में अपने परिवार के सम्पूर्ण कष्ट अपने प्राणों पर भी झेल कर अपना जीवन हँसते हँसते न्योछावर  करने वाली  नारी की गाथाएं बहुत सारी  फिल्मों का प्रधान विषय रही हैं| महबूब खान की फिल्म "मदर इण्डिया" एक ऐसी ही महिला की कहानी है,जिसके संघर्ष तो इतने थे कि उनका  अंत ही नहीं था ,परन्तु फिर भी वह अग्रसर थी अपने कर्तव्य पथ पर बिना  अपने आदर्शों से कोई समझौता करे| कहा जाए तो स्वाधीनता के एक दशक बाद रिलीस हुई इस फिल्म में नरगिस दत्त का किरदार पूरे हिन्दुस्तान का प्रतीक था|

प्यासा (Pyaasa Movie)

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प्यासासाहित्य समाज का दर्पण होता है| इसी प्रकार फ़िल्में भी समकालीन परिस्तिथियों से प्रभावित होती हैं| स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की यह  फिल्म भी तत्कालिक प्रभावों से अछूती नहीं रही है| समाज के विद्रूप, छल और कपट से आक्रोशित नायक द्वारा अपना मौलिक अस्तित्व को ही अस्वीकार कर देना चरम सीमा ही कहा जा सकता है| कुछ इसी हताशा को गुरुदत्त ने बेहतरीन तरीके से परदे पर दिखाया है|

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