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ये साली जिंदगी (Yeh Saali Zindagi Movie)

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ये साली जिंदगी

'हजारों ख्वाहिशें ऐसी' जैसी बेहतरीन फिल्म बनाने के बाद सुधीर मिश्रा लेकर आए हैं 'ये साली जिंदगी'। फिल्म अपने शीर्षक से पहले ही चर्चा में आ चुकी थी| फिल्म के शीर्षक में शब्द “साली” से सेन्सर बोर्ड को काफ़ी तकलीफ़ थी पर अंत में जीत सुधीर मिश्रा की ही हुई|  मल्लिका शेरावत के 17 चुंबन के कीर्तिमान को तोड़ने को लेकर भी इस फिल्म को काफ़ी लोकप्रियता मिली| 

फिल्म एक रोमानी थ्रिलर है जिसकी कहानी आर्थिक घोटाले की थीम पर रची गई है। अरुण (इरफ़ान खान) पर इस घोटाले की जांच की जिम्मेदारी है। इसी जांच के सिलसिले में जब वो प्रीति (चित्रांगदा सिंह) से मिलता है तो न सिर्फ उसे प्रीति की सच्चाई पर यकीन होता है बल्कि वो उसे चाहने भी लगता है। बाद की फिल्म प्रीति को निर्दोष साबित करने की जद्दोजहद के ऊपर है, वहीं कुलदीप (अरुणोदय सिंह) एक सरगना है जिसके पास कोई काम नहीं है और उसकी पत्नी उसे छोड़ने की धमकी देती रहती है। इन चारों के आपसी संबंध फिल्म में कई मोड़ लाते हैं, रिश्तों के इन्हीं ताने-बानों के इर्द गिर्द बुनी गई है 'ये साली जिंदगी'।

पूरी फिल्म पर यथर्द्वादी फिल्मों के लिए प्रसिद्ध सुधीर मिश्रा के निर्देशन की छाप साफ दिखाई देती है। फिल्म का जोरदार संपादन आपको बांधे रख सकता है। दुविधा से भरपूर इस फिल्म में काफी अंतरंग दृश्य हैं। सुधीर ने लगभग सभी कलाकारों से सधा हुआ अभिनय करवाया है।

चित्रांगदा और इरफ़ान का अभिनय तो जानदार है ही मगर अरुणोदय सिंह एक आश्चर्य के तौर पर उभरकर आए हैं। उन्होंने फिल्म में एक सरगना की भूमिका में जान डाल दी है। वहीं दिल्ली-6 में एक छोटी सी भूमिका करने के बाद इस फिल्म में नजर आई अदिति ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है। उनके और अरुणोदय के बीच फिल्माए गए अंतरंग दृश्यों में अश्लीलता नजर नहीं आती है।

निशात खान ने थीम के अनुरूप संगीत रचने में काफी मेहनत की है। सिनेकाला और संपादन पर इस फिल्म में काफी काम किया गया है जो बहुत ही प्रभावशाली है। सुधीर मिश्रा और मनु ऋषि के लिखे संवाद बढ़िया हैं लेकिन इसमें गालियों का भी काफी प्रयोग किया गया है। क्योंकि फिल्म दिल्ली की गलियों की है, फिल्म के संवादों को वही टच देने की कोशिश की गयी है जिसमे दोनों सफल रहे है|  

हालाँकि फिल्म की कहानी बेहद पेचीदा है और फिल्म ज़रूरत से ज़्यादा लंबी होने की वजह से अंत तक उबोउ होने लगती है|  सुधीर मिश्रा के दिमाग़ मे जैसे बहुत सारी कहानियाँ घूम रही थी और उन्होने सारी एक साथ कहने की कोशिश की है|  फिल्म को तोड़ा छोटा करके एक उम्दा फिल्म बनाई जा सकती थी|

संपूर्ण मे कहे तो फिल्म ‘यह साली जिंदगी’ सुधीर मिश्रा के मापदंडो पर खरी नही उतरती पर निश्चित ही ये एक अलग तरह की फिल्म है जिसे एक बार ज़रूर देखा जा सकता है|

अंक: ***


 

 

निर्देशक: सुधीर मिश्रा
निर्माता: प्रकाश झा
लेखक: सुधीर मिश्रा
कलाकार: इरफ़ान खान, चित्रांगदा, अरुणोदय सिंह
संगीत: निशात खान
फिल्म रिलीज़: 4 फरवरी,2011


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