आप यहाँ है: मुख्यपृष्ठ फिल्म समीक्षा 10 दशक रॉकस्टार (Rockstar Movie)

रॉकस्टार (Rockstar Movie)

( 5 Votes )
उपयोगकर्ता अंक: / 5
ख़राबश्रेष्ठ 
Rockstar

जिंदगी में बड़ा बनने के लिए कुछ खोना ज़रूरी है, दर्द सहना ज़रूरी है| हर बड़े कलाकार ने, फिर चाहे वह गायक हो, संगीतकार हो, या पेंटर हो, गम झेलकर ही कामयाबी पाई है| इम्तियाज़ अली की फिल्म रॉकस्टार भी इसी तर्क पर बनी है जहाँ नायक जॉर्डन को भी कामयाब होने के लिए दर्द के सागर से निकलना पड़ता है|

रॉकस्टार थीम को लेकर बॉलीवुड में पहले भी फिल्में बन चुकी है जिन्हे बहुत सराहना नही मिली| लंदन ड्रीम्स असफल रही और रॉक ऑन भी एक सीमित वर्ग में सफल रही| वही इम्तियाज़ अली इससे पहले जब वी मेट और लव आज कल जैसी बेहतरीन फिल्में दे चुके है| लिहाज़ा यही उम्मीद थी कि इस बार रॉकस्टार थीम पर फिल्म दर्शकों को पसंद आएगी पर शायद दर्शकों को अभी थोड़ा और इंतज़ार करना होगा|

फिल्म कहानी है जनार्दन जाखर (रणबीर कपूर) की जो अपने आदर्श ‘जिम मोर्रिसन’ की तरह एक रॉकस्टार बनना चाहता है पर हर तरफ से उसे सिर्फ़  ज़िल्लत और अपमान ही सहना पड़ता है| उसे मदद और सहानुभूति मिलती है केंटीन के मालिक ख़तना से जो उसे सफल होते देखना चाहता है| ख़तना जनार्दन को एहसास करवाता है कि सब बड़े कलाकारों में एक चीज़ सामान्य है- गम| हर कलाकार के पीछे एक दुख भरी कहानी है जो उनके लिए प्रेरणा का काम करती है| पर जनार्दन की जिंदगी में ऐसा कुछ नही है – उसके माँ बाप अभी ज़िंदा है, उसके साथ कभी मारपीट नही हुई, उसके साथ कभी छेड़छाड़ नही हुई||!!

सफल होने की इसी चाह में वो निकल पड़ता है अपना दिल तुड़वाने| इसके लिए वो हीर कौल (नरगिस फखरी) को चुनता है  जो अपने कॉलेज की सबसे सुंदर लड़की है और दिल तोड़ने की मशीन के नाम से जानी जाती है| हीर एक सुंदर, समझदार और अमीर लड़की है जिसकी 2 महीने में शादी होने वाली है| पर शादी से पहले हीर हर तरह का वो काम करना चाहती है जो कोई शरीफ लड़की नही करती- फिर चाहे वा दिल्ली के हॉल मे जंगली जवानी देखने की बात हो या देसी दारू पीने की| और उसकी इस ख्वाइश को पूरा करने के लिए जनार्दन उसका साथ देने को तैयार है|

दोनों के बीच की दोस्ती में पनप रहे प्यार का अहसास हीर को होता है लेकिन वो इसका इज़हार कर सके इसके पहले ही हीर की शादी हो जाती है और वो प्राग (चेक रिपब्लिक)चली जाती है| वही दूसरी और जनार्दन पर झूठा इल्ज़ाम लगा कर उसके घरवाले उसे घर से बाहर निकल देते है और वह दर दर की ठोकरे खाता है| उसकी  जिंदगी में एक दिलचस्प मोड़ आता है जब उसे एक संगीत कंपनी द्वारा अनुबंधित किया जाता है और उसे प्राग जाने का मौका मिलता है| प्राग में अब वह जॉर्डन के नाम से जाना जाता है| कहानी बढ़ते हुए जॉर्डन को उस मुकाम पर ले जाती है जहाँ वो हमेशा पहुँचने के सपने संजोए करता था पर वहाँ पहुँच कर भी उसकी जिंदगी में सिर्फ़ गम और दर्द ही है|

इम्तियाज़ अली की रॉकस्टार टुकड़ो में अच्छी लगती है| जहाँ फिल्म का पहला भाग बेहद उम्दा और मनोरंजक है वही दूसरे भाग उबऔ और खींचा हुआ लगता है| इम्तियाज़ अली जैसे सफल निर्देशक होने की वजह से फिल्म से काफ़ी उम्मीदें थी पर उन्होने निराश किया| उन्होने जॉर्डन द्वारा झेले गये दर्द के दृश्यों को बेहद कम समय दिया जिस वजह से दर्शक उसके दर्द से जुड़ने मे असफल रहा| जहाँ वे जॉर्डन, एक रॉकस्टार पर शुरू हुए थे, वही अंत तक आते आते वे हीर और जॉर्डन की प्रेम कहानी में उलझ गये| या कहे तो दूसरे भाग में फिल्म ने अपनी गति और दिशा, दोनो ही खो दी| फिर भी उनके निर्देशित कुछ दृश्य बेहद उम्दा थे, जैसे जनार्दन का दरगाह में में बिताए दिन, जनार्दन और हीर के प्रेम संबंध आदि| फिल्म की पटकथा भी बेहद ढीली रही जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या मैं वाकाई इंतियाज़ अली की फिल्म देख रहा हूँ| हीर जॉर्डन की प्रेम कहानी पर थोड़ा कम समय देकर फिल्म को थोड़ा और छोटा किया जा सकता था|

रणबीर कपूर के लिए लिखा गया उनका किरदार बेहद उम्दा था और रणबीर ने भी इस पात्र के साथ पूरा इंसाफ़ किया| ये उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ अभिनय रहा और उन्होने इस रोल में अपनी पूरी जान लगा दी| वही नरगिस फखरी के अभिनय के बारे मे कुछ ना ही कहा जाए तो बेहतर है| समझ नही आया की उन्हे किस वजह से फिल्म मे लिए गया| उनका अभिनय फिल्म पर ब्रेक लगाने का ही काम करता रहा| शम्मी कपूर को लंबे अरसे बाद पर्दे पर देखकर अच्छा लगा पर अली उन्हे बेहतर किरदार दे सकते थे| शेष कलाकार सामान्य रहे|

फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है इसका संगीत| फिल्म एक रॉकस्टार पर होने के साथ साथ एक प्रेम कहानी भी है| लिहाज़ा संगीत का अव्वल होना लाज़मी था| और सही मायनो में ए|आर|रहमान का संगीत फिल्म की जान रहा| उनके संगीत ने ना सिर्फ़ फिल्म को बाँधे रखा पर दर्शकों का भी अच्छा मनोरंजन किया| वही मोहित चौहान की आवाज़ ने उनके संगीत पर चार चाँद लगा दिए| “साड्डा हक”पहले से ही दर्शकों को बेहद पसंद आ रहा है| बाकी गीत भी फिल्म देखने के बाद और पसंद आने लगेंगे|

सिनिमॅटोग्रफर अनिल मेहता ने बेहद उम्दा काम किया है और उन्होने कश्मीर और प्राग के दृश्य बहुत खूबसूरती से फिल्माए है| वही एडिटर आरती बजाज का काम भी तारीफ़ के काबिल है| अक्की नरूला और मनीष मल्होत्रा द्वारा डिज़ाइन किए कॉस्ट्यूम थोड़े हटकर है और निश्चित ही दर्शकों को पसंद आएँगे|

संपूर्ण मे कहे तो फिल्म पूरी तरह उम्मीदों पर खरी नही उतरती- वजह ढीली पटकथा, लंबी कहानी और दूसरे भाग में फिल्म का दिशाहीन होना| फिर भी फिल्म पूरी तरह रणबीर कपूर और ए|आर|रहमान की है जिनका अभिनय और संगीत जादू दर्शकों को कम से कम एक बार सिनिमा हॉल तक खींच लाएगा|

अंक: ***1/2

अम्बर श्रीवास्तव द्वारा रॉकस्टारम की समीक्षा के लिय क्लिक करें


निर्देशक: इम्तियाज़ अली
निर्माता: इरोस इंटरनॅशनल
कलाकार: रणबीर कपूर, नर्गिस फाखरी, शम्मी कपूर
लेखक: इम्तियाज़ अली
संगीत: ए.आर.रहमान
फिल्म रिलीज़: 10 नवम्बर 2011

चर्चित लेख

 

नवीनतम लेख

 

जन्मदिन

 
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन

हमे ढूंढे

 

भारत एक विविधिताओं का देश है| यहाँ अनगिनत धर्मों, मज़हबों, जातियों, संस्कृतीयो, भाषाओं, त्योहारों, लोकगीतों आदि का एक अद्भुत और भव्य संगम है |
और पढ़े...

ई-मेल:

फ़ोन नंबर: +91-9971138071


Feedback Form
Feedback Analytics