आप यहाँ है: मुख्यपृष्ठ फिल्म समीक्षा 10 दशक मिले ना मिले हम (Miley Naa Miley Hum Movie)

मिले ना मिले हम (Miley Naa Miley Hum Movie)

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miley naa miley hum

विच्छेदित परिवार पर आधारित पहले भी कई फिल्में बन चुकी हैं | मिले ना मिले हम भी एक ऐसी ही फिल्म है जो कद्दावर नेता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान की पहली फिल्म है | इस फिल्म का नायक पूरी तरह से टेलरमेड अच्छाइयों का पुतला है जो अपने अलग हो चुके माता पिता को फिर से एक साथ करना चाहता है |  

यह फिल्म चिराग (चिराग पासवान) की कहानी है जिसकी माँ शालिनी (पूनम ढिल्लो) और पिता सिद्धार्थ (कबीर बेदी) का अलगाव उसके बचपने में ही हो चुका है| चिराग बारी बारी दोनों के साथ अपना समय गुज़ारता है एवं उनके व्यवसाय में मदद भी करता है| चिराग की एक ही ख्वाहिश है, वह है अपने माता पिता को मिलाने की|

कहानी में मोड़ तब आता है जब सिद्धार्थ अपने दोस्त की बेटी मनजीत (नीरू बावजा) से चिराग की शादी तय करना चाहता है जबकि शालिनी काम्या (सागरिका) को अपनी बहू बनाना चाहती है| चिराग की समस्या यह है कि वह इन दोनों में से किसी से भी शादी नहीं करना चाहता| उन्हें टालने की गरज से चिराग अपने माता पिता को अपनी प्रेमिका अनुष्का (कंगना राणावत) के बारे में झूठी कहानी बताता है| अनुष्का एक मॉडल है, जिसे हक़ीकत में वह जानता तक नहीं| इसके बाद अपने झूठ को निभाने के लिए चिराग अनुष्का के साथ एक सौदा करता है|

फिल्म की कहानी तीन नायिकाओं के एकलौते नायक पर टिकी है जिसमें न तो मजबूत प्रेम कहानी ही दिखती है और न ही सशक्त ड्रामा| यह फिल्म गुज़रे जमाने की फिल्मों की याद दिलाती है जिसमें शादियों का निर्णय माँ पिता के हाथों में होता था| आज के युग में यह बात हजम नहीं होती| निर्देशक तनवीर ख़ान की कहानी में कोई नयापन नहीं है|

विच्छेदित परिवार के बच्चे की मनोदशा के आधार पर पटकथा में काफ़ी संभावनाएँ हो सकती थी जिसका पूरा प्रभाव गिरीश धमीजा, तनवीर ख़ान और गुरजीत ग्रेवाल नहीं दर्शा पाए  पर कंगना की अटपटी भूमिका के साथ हास्य एवं मनोरंजन की गुंजाइश बनती रही| दूसरी तरफ, नायक की संवेदनाएँ दर्शकों के साथ नहीं जुड़ पाती|  पटकथा के हिसाब से तनवीर ख़ान का निर्देशन बेहतर था जिसका प्रभाव भावुक दृश्यों में काफ़ी रहा| बाबा आज़मी का छायांकन स्तरीय था |

इस फिल्म के लिए जावेद अख़्तर के गीत पर साजिद वाजिद का संगीत कर्णप्रिय है| हाँ यही प्यार एवं नज़र से नज़र गाने सुहावने हैं वही एक आयटम गाना कॅटटो गिलहरी कदम थिरकानेवाले हैं|

अभिनय: यह फिल्म चिराग पासवान के लिए है पर उनकी अदाकारी एवं भाव भंगिमा में शुरुआती फिल्मवाली हिचक दिखती है पर व्यक्तित्व उनकी एक ख़ासियत है| कंगना राणावत की अजीब सी हास्य भूमिका मनोरंजक बन पड़ी है, सागरिका और नीरू बावजा के हिस्से कुछ खास करने को था नहीं फिर भी वो ठीक ठाक रही| पूनम ढिल्लो एवं कबीर बेदी अपेक्षा के हिसाब से स्वाभाविक रहे |

एक अनुमानित सी गुज़रे जमाने की कहानी, जिसमें हास्य एवं ड्रामा के साथ प्रेम कहानी भी है लेकिन न तो प्रेम कहानी प्रभावित कर पाती है और न ही ड्रामा |

अंक: **


निर्देशक: तनवीर खान
निर्माता: मेवरिक प्रोड़कशंस
लेखक: गिरीश धमीजा
कलाकार: कंगना रानौत, चिराग पासवान, कबीर बेदी
संगीत: साजिद वाजिद
फिल्म रिलीज़: 4 नवम्बर, 2011 

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