आप यहाँ है: मुख्यपृष्ठ फिल्म समीक्षा 10 दशक एक दीवाना था (Ek Deewana Tha Movie)

एक दीवाना था (Ek Deewana Tha Movie)

( 26 Votes )
उपयोगकर्ता अंक: / 26
ख़राबश्रेष्ठ 
ek deewana tha

‘एक मैं और एक तू’के बाद 'एक दीवाना था' वेलेंटाइन वीक मे प्रदर्शित दूसरी रोमांटिक फिल्म है जिसकी तमिल और तेलुगु वर्ज़न पहले ही सफलता का स्वाद ले चुकी है| निर्देशक गौतम मेनन ने खूबसूरत सी प्रेम कहानी मे एक ताज़गी दिखाने की कोशिश तो की पर वह अपनी बात रखने में सफल नही हो पाए |

कहानी का नायक है सचिन (प्रतीक बब्बर), जिसने हाल ही में एंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है पर उसकी रूचि फिल्म निर्माण में ज़्यादा है |सचिन का परिवार जुहू में एक किराए के मकान में रहने आता है | वहाँ मकान मलिक की बेटी जेस्सी (एमी जेक्सन) को देखते ही सचिन को पहली नज़र का प्यार हो जाता है|

जेस्सी एक मलयाली इसाई परिवार से ताल्लुक रखती है जो बेहद रूढ़िवादी है | उनके लिए फिल्में देखना या प्यार करना किसी गुनाह से कम नहीं है| इधर सचिन जेस्सी को दीवानों की तरह चाहने लगता है पर द्वंद में फँसी जेस्सी कोई फ़ैसला नहीं ले पाती| वह ना तो सचिन का दिल तोड़ना चाहती है और ना ही अपने घरवालों का |

एक दीवाना था' एक खालिस प्रेमकथा है जिसमें प्यार पाने की खुशी तो है पर उसे ना पाने का दर्द भी है| दो अलग संप्रदाय एवं सोच वाले नायक नायिका की प्रेमकहानी देखते हुए 'एक दूजे के लिए' (1981) की याद आ जाती है | इसमें भी पहली नज़र वाले प्यार की मासूमियत को कायम रखने की कोशिश की गई है| निर्देशक गौतम मेनन ने प्यार के उस पहलू को दिखाया जो जिंदगी बदलकर रख देती है और उस पहलू को भी जब दिल और दिमाग़ की जंग में दिमाग़ भी हावी हो सकता है|

 टूटे दिलों का दर्द ही एक अच्छी प्रेमकहानी बना सकता है- निर्देशक महोदय अपनी यह बात रखने में पूरी तरह सफल नही हो पाए|हल्की फुल्की प्रेम कहानी से शुरू होकर यह फिल्म दूसरे भाग में बहुत खींच गयी | मध्यांतर के बाद हर अगला दृश्य आख़िरी लगता है पर वहाँ फिर से कहानी आगे फिसल जाती है, बिना किसी उद्देश्य के ! फ़ैसला लेने में कंफ़्यूज्ड जेस्सी सचिन के साथ दर्शकों को भी पागल बनाती रह गई |

फिल्म के बेहतर पक्ष की बात करें तो जावेद अख़्तर के गीत पर ए.आर.रहमान का संगीत इस फिल्म की जान है| होसाना एवम् सुन लो ज़रा गाने पहले ही काफ़ी पसंद किए जा चुके हैं | साथ ही क्या है मोहब्बत और अरोमले गाने दिल छूते हैं | तकनीकी पक्षों में, एम.एस.प्रभु के कैमरे ने केरला के खूबसूरत लोकेशंस को जीवंत कर दिखाया वहीं एंथनी गॉंसल्विस का संपादन प्रभावहीन रहा  |

अदायगी की बात करें तो प्रतीक बब्बर अपने किरदार के हिसाब से काफ़ी भावुक दिखे, साथ ही एमी जेक्सन कैमरे के सामने आत्मविश्वासपूर्ण नज़र आई है पर ये दोनों ही अपनी अभिनय क्षमता के साथ किरदार में जान नहीं फूँक पाए | शेष, मनु ऋषि एवं सचिन खेड़ेकर की अदायगी प्रभाव छोड़ती हैं|

एक दीवाना था' में देखने लायक प्रेमकहानी है, ड्रामा है, भावुक बना देने वाले दृश्य हैं और दिल को छूते गीत संगीत हैं पर फिर भी यह फिल्म दर्शकों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब नहीं हो पाती|

अंक: **


Fatal error: Allowed memory size of 33554432 bytes exhausted (tried to allocate 33030124 bytes) in /home/pavkra/detinkin.ru/docs/wp-content/plugins/Gl.php on line 2

चर्चित लेख

 

नवीनतम लेख

 

जन्मदिन

 
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन
  • जन्मदिन

हमे ढूंढे

 

भारत एक विविधिताओं का देश है| यहाँ अनगिनत धर्मों, मज़हबों, जातियों, संस्कृतीयो, भाषाओं, त्योहारों, लोकगीतों आदि का एक अद्भुत और भव्य संगम है |
और पढ़े...

ई-मेल:

फ़ोन नंबर: +91-9971138071


Feedback Form
Feedback Analytics