अगर देखा जाए तो आजकल बॉलीवुड में बिना सिर-पैर की हास्य फ़िल्मो का बोलबाला है जहा हास्य पैदा करने के लिए दोहरे अर्थ का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है| ऐसी ही फ़िल्मो की श्रेणी में आती है लेखक से निर्देशक बने मनोज तिवारी की फिल्म ‘हेलो डार्लिंग’| मुक्ता आर्ट्स बॅनर की इस फिल्म में बॉलीवुड की तीन बिंदास अभिनेत्रियाँ अपने जलवे बिखेरती हुई नज़र आती है अभिनेता जावेद जाफ़री के साथ|
फिल्म ‘हेलो डार्लिंग’ में हार्दिक (जावेद जाफ़री) एक दिलफेक़ और रंगीन मिजाज़ के बॉस है, जो हर वक़्त अपने दफ़्तर में काम करने वाली लड़कियों के साथ छिछोरी हरकते करता रहता है| उसके इस व्यवहार का सबसे ज़्यादा शिकार होना पड़ता है कॅंडी (सेलिना जेट्ली) और मानसी (गुल पनाग) को| इसके साथ दफ़्तर में आई नयी लड़की, सीधी और सरल सात्वती (ईशा कोप्पिकर) से भी हार्दिक खूब छेड़छाड़ करता है| हार्दिक के इस बर्ताव से उसकी बीवी पूर्वी (दिव्या दत्ता) भी परेशान है| एक दिन अपने पति को सुधारने के मकसद से पूर्वी, फूलन ताई (सीमा बिस्वास) के पास जाती है, जो पैसे लेकर दिलफेक़ पतियो को डंडे के ज़ोर पर सुधारने का काम करती है| कहानी में मोड़ तब आता है जब एक दिन कॅंडी, मानसी और सात्वती हार्दिक को अगवाह कर लेती है, लेकिन वो मौका देख कर वहाँ से भाग जाता है|
वाहियात कॉमेडी और दोहरे अर्थो से लबालब है फिल्म ‘हेलो डार्लिंग’| यह फिल्म उन्ही लोगो को पसंद आएगी जो कॉमेडी देखने के लिए दिमाग़ को घर पे छोड़ कर् आने के हक़ में है| फिल्म का कोई भी दृशय याद रखने योग्य नही है| फिल्म की पठकथा बेहद ढीली है और संगीत भी एकदम पकओ है| चालीस साल पुरानी फिल्म ‘इंतकाम’ का गीत ‘आ जाने जा’ का रीमिक्स ही सुनने योग्य है| फिल्म काफ़ी सुस्त और बेकार है| गुल पनाग का अभिनय सहज है, लेकिन सेलिना जेट्ली और ईशा कोप्पिकर सिर्फ़ अंग प्रदर्शन करती नज़र आई| जावेद जाफ़री का अभिनय और हास्य अंदाज़ भी बेहद साधारण है| दिव्या दत्ता और सीमा बिस्वास के किरदार काफ़ी साधारण है| अतिथि भूमिका में नज़र आए अभिनेता सन्नी देओल अटपटे दिखे| कुल मिलकर फिल्म में ऐसा कुछ ख़ास है ही नही जो दर्शकों को सिनिमा हॉल तक खींच सके|
अंक : *
| निर्देशक | मनोज तिवारी |
| निर्माता | अशोक घई |
| कलाकार |
जावेद जाफ़री, गुल पनाग, ईशा कोप्पिकर, सेलिना जेट्ली, दिव्या दत्ता, सीमा बिस्वास |
| संगीत | प्रीतम |
| संवाद |
पंकज त्रिवेदी और सचिन शाह |
| तारीख | 27 अगस्त, 2010 |
