सामाजिक मुद्दों को उठाने वाली फिल्में भारतीय फिल्मी जगत में बहुत बनी है| काई सफल रही और कुछ दर्शकों के गले नही उतरी| उन्ही गले ना उतरने वाली फिल्मों में से है 'क्रुक'|
क्रुक की कहानी हाल ही ऑस्ट्रेलिया में हो रही जातिवाद से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है| इमरान हाशमी(जाई) अपने पेशे और एक अच्छी ज़िंदगी की तलाश में ऑस्ट्रेलिया जाता है और वहाँ की नागरिकता हासिल करने की कोशिश करता है| वहाँ जय(जो अब सूरज बन चुका है) की मुलाक़ात सुहानी ( नेहा) से होती है|
नेहा एक दिल की साफ़ लड़की है जो दिल से पूरी तरह भारतीय है| सुहानी के साथ साथ जय एक ऑस्ट्रेलियन लड़की निकोल से भी नज़दीकियाँ बढ़ाता है| निकोल जो एक स्ट्रीप क्लब में काम करती है, दिल से नेक और साफ है| निकोल का भाई रूस्सल, भारतीयों से नफ़रत करता है और उन्हे अपने देश से निकाल देने की राय रखता है| जय एक दिन अपने एक दोस्त पर कुछ ऑस्ट्रलियाई लड़कों द्वारा हमला होते देख लेता है और यहीं से उसकी मुश्क़िलें शुरू हो जाती है|
वैसे भट्ट कॅंप से निकली फिल्मों का संगीत और कहानी दोनो ही मजबूत होते है लेकिन क्रुक में आपको यह बिल्कुल देखने को नही मिलता| एक लड़का जो बुरा होके भी बुरा नही है, एक विदेश में पली लड़की जो दिल से आज भी भारतीय है, एक अंग्रेज लड़की जिसके लिए किसी के भी साथ सोना एक आम बात है, और कुछ ऐसे लोग जो बिना वजह किसी को भी मार सकते है| फिल्म आपके सब्र का इम्तेहान लेती है| फिल्म के निर्देशक मोहित सूरी फिल्म के अंत तक यह नही स्थापित कर पाते की वो एक रोमानी फिल्म बनाना चाहते है या फिर एक संजीदा फिल्म| फिल्म में कलाकारों का अभिनय औसत से नीचे है और दर्शक की समझदारी का मज़ाक उड़ाता है|
लेकिन फिल्म का सबसे कमज़ोर पहलू उसकी पटकथा और संवाद है, जो जातिवाद से जुड़े इस संगीन मसले को आपके सामने लाने में नाकामयाब रहें है| फिल्म के गाने प्रीतम द्वारा संगीत-बद्ध किए गये है और उनमें वो खनक नही है जो 'मेट्रो' जैसी फिल्मों में थी|
अगर आप एमरान के बहुत बड़े प्रशंसक है तो यह फिल्म देखी जा सकती है, लेकिन अगर नही तो इस फिल्म में आपको खुद के लिए कुछ नया या सराहनीय नही मिलेगा|
| निर्देशक: | मोहित सूरी |
| निर्माता: | महेश भट्ट |
| कलाकार: | इमरान हशमी, नेहा शर्मा |
| संवाद: | मोहित सूरी |
| संगीत: | प्रीतम |
| फिल्म रिलीज़: | 8 अक्टूबर, 2010 |
