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बैंड बाजा बारात (Band Baaja Baaraat Movie)

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बैंड बाजा बारात

शादियों पर आधारित फिल्में हमेशा से हिन्दी दर्शकों को आकर्षित करती रही हैं | ऐसे में फिल्म बैंड बाजा बारात में दिल्ली की मशहूर शादियाँ हैं, उनसे जुड़े गीत-संगीत एवं समारोह हैं, उत्कृष्ट साज़ सज्जा है और सबसे दिलचस्प बात यह कि नायक नायिका शादी करनेवाले जोड़े नहीं बल्कि शादी करवानेवाले वेडिंग प्लानर हैं| बाहरी चमक दमक व धूम धड़ाकों से दर्शकों को आकृष्ट करनेवाले इस फिल्म की कमान मनीष शर्मा के हाथों में थी, जिनकी निर्देशकीय पारी की यह शुरुआत है|

फिल्म की कहानी श्रुति (अनुष्का शर्मा) से शुरू होती है जो दिल्ली की मध्यमवर्गीय परिवार से है| जिंदगी के प्रति उसका नज़रिया और लक्ष्य स्पष्ट हैं| इसके उलट बिट्टू (रणवीर सिंह) अपने गाँव से दूर दिल्ली में सिर्फ़ इसीलिए पढ़ाई कर रहा है ताकि उसे अपने पिता के संग खेतों में काम न करना पड़े !

श्रुति और बिट्टू एक शादी में मिलते हैं| शुरुआती बक झक के बाद दोस्ती की शुरुआत होती है और दोनों अपने वेडिंग प्लानिंग कंपनी के लिए योजना बनाते हैं, इस शर्त के साथ कि जिससे व्यापार करो उससे कभी प्यार न करो| दोनों की योजना 'शादी मुबारक कंपनी' के रूप में शुरू होती है और फिर एक एक कर कामयाबी उनके रास्ते में आती चली जाती है| .. पर एक रात दोनों के बीच कुछ ऐसा घट जाता है कि दोनो अपने रास्ते और व्यवसाय अलग कर लेते हैं |

अब व्यवसाय में नुकसान का दौर शुरू हो जाता है| इसके बाद फिर से दोनों के व्यवसाय के साथ दिल कैसे मिल पाते हैं- यही फिल्म की आगे की कहानी में है |

फिल्म की कहानी में कोई ताज़गी नहीं| दर्शक आसानी से आगे की कहानी का पूर्व अनुमान लगाते चले जाते हैं | हाँ, इसका मनोरंजक पहलू हावी रहा और  शुरू के दस मिनट के बाद यानि कहानी के ट्रेक पर आने के साथ ही दर्शक उसी दुनिया में खींचे चले जाते हैं| फिल्म का पहला घंटा कई शादियों के उत्साह और धूम धड़ाकों के बीच गुजर जाता है| मध्यांतर के बाद जब श्रुति और बिट्टू अलग हो जाते हैं, दोनों के बीच लड़ाइयों और परेशानियों का दौर शुरू हो जाता है | फिल्म का अंतिम 15 मिनट, जब दोनों को एक वेडिंग असाइनमेंट के लिए मिलकर काम करना पड़ता है, के बाद से कहानी ट्रेक पर वापस आ जाती है|

इस फिल्म की कहानी है तो साधारण सी, पर निर्देशक मनीष शर्मा पूरी फिल्म के दौरान दर्शकों पर अपनी पकड़ बनाए रखते हैं| पटकथा लेखक हबीब फैसल ने दिल्ली की शादियों को बखूबी पिरोया| वहीं मजाकिया संवाद के साथ ठेठ दिल्ली स्टाइल की बोली इस फिल्म की जान है| असीम मिश्रा का छायांकन दर्शकों को शादी अटेंड करने के मज़े दे गया| साथ ही नम्रता राव के संपादन में कोई कमी नहीं दिखती |

संगीत की बात करें तो सलीम सुलेमान की यह प्रस्तुति दर्शकों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहा | फिल्म के मूड के हिसाब से इसका गीत संगीत ऐसा होना चाहिए था जो नाचने गाने पर मजबूर कर दे | पंजाबी तड़के की वजह से गाना ‘एं वइ एं वइ’ कदम थिरकाता है| इसके बाद ‘दम दम’ व ’तरकीबे’ गाने काफ़ी कर्णप्रिय हैं| वैभवी मर्चेंट का नृत्य निर्देशन गानों के मूड के हिसाब से हैं|
अभिनय: रणवीर सिंह का मंजा हुआ काम कहीं से भी पहली फिल्म वाला नहीं लगता क्योंकि संवाद अदायगी के साथ उसके हाव भाव भी बेहतरीन हैं| अनुष्का शर्मा की बात करें तो वह पहले ही फिल्म 'रब ने बना दी जोड़ी' से अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी है | इस फिल्म में उसने दिल्लीवाली पंजाबी कुड़ी और उसकी महत्वाकांक्षाओं की शानदार प्रस्तुति की| साथ ही रणवीर और अनुष्का के बीच की केमिस्ट्री लाजवाब थी|

सहायक कलाकारों में मनमीत सिंह, मनीष चौधरी एवं नीरज सूद ने अपने हिस्से का काम अच्छा निभाया| फिल्म बैंड बाजा बारात का यूएसपी है रणवीर- अनुष्का के बीच की केमिस्ट्री, गीत संगीत एवं ठेठ दिल्ली की पंजाबी संस्कृति के मज़े देता संवाद, जिसके बूते इस फिल्म का मनोरंजक पक्ष कहीं भी कमजोर नहीं पड़ा |

अंक: ***1/2


 

 

निर्देशक: मनीष शर्मा
निर्माता: आदित्य चोपड़ा
कलाकार: रणवीर सिंह, अनुष्का शर्मा
संगीत: सलीम-सुलेमान
लेखक: मनीष शर्मा
फिल्म रिलीज़: 10 दिसम्बर, 2010

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