'हँसी मे छुपा दर्द
"लाइफ एक रेस है, तेज़ नहीं भागोगे तो कोई तुम्हे कुचल कर आगे निकल जाएगा|"
'कामयाब नही काबिल बनो', यही कहती है राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘3 ईडियट्स’| निर्देशक हिरानी ने अपनी फिल्म से भारतीय शिक्षा प्रणाली की कमियों और उसकी वजह से विद्यार्थियों पर पढ़ रहे दवाबो को उजागर किया है| फिल्म रॅटटामार प्रणाली पर भी वयंग कास्ती है| और यह कहना ग़लत नही होगा की ‘3 ईडियट्स’ साल 2009 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है, जो अपनी दमदार कहानी और उससे भी दमदार विषय के कारण हिन्दी सिनिमा की बेहतरीन फ़िल्मो में से एक है| फिल्म लेखक चेतन भगत की आई. आई. टी. पर आधारित "5 पॉइंट सम्वन" से मिलती जुलती होने की वजह से विवादों मे भी रही|
एक इंजिनियरिंग कॉलेज का असाधारण प्रतिभा वाला छात्र रांचो(आमिर खान) रटने की जगह सीधे साधे ढंग से विद्या हासिल करना चाहता है| अपनी राहे खुद बनाने वाला आमिर, अपने दो दोस्तो, फरहान(माधवन) और राजू(शरमन जोशी) को इसी चूहा दौड़ से बचाने का प्रयास करता है| फिल्म एक रॅट्ट्मार विद्यार्थी चतुर(ओमी वैद्या) और रांचो की तुलना भी करके संदेश भेजने की कोशिश करती है| इसके साथ ही आमिर हमेशा इस बात पर ज़ोर देता है के काबिल बनो, कामयाबी झक मार के पीछे आएगी| और यहा तक की वह अपने प्रिन्सिपल बोमन ईरानी को भी इसी जड़ता से निकालना चाहता है| पूरी फिल्म आमिर के इसी संघर्ष की कहानी है|
फिल्म का निर्देशन, पठकता, संवाद सभी सर्वश्रेष्ठ है, जिसका श्रेय हिरानी को जाता है| फिल्म का हर प्रसंग, दृशय, और भाव दिल और दिमाग़ दोनो को छूता है| हर दृशय इतनी बुद्धिमानी से दिखाया और दर्शाया गया है की दर्शक हस्ते भी है और उसमे छुपे दर्द से रोते भी है| आमिर के अभिनय की जितनी तारीफ़ की जाए वो कम ही होगी| शरमन और माधवन ने भी अपने पात्रो के साथ भरपूर न्याय किया है| बोमन ईरानी अपने किरदार और अभिनय से बेहद गुदगुदाता है| हालाँकि करीना कपूर का किरदार बहुत सिमित है और उनकी प्रेम कहानी कुछ ख़ास नही दिखती| लेकिन फिर भी अपने छोटे से रोल से वो अपने अभिनय की छाप छोड़ती है| फिल्म का संगीत भी काबिल-ए-तारीफ़ है और दर्शकों को बेहद पसंद आया है|
गाने:
| गिव मी सम सन शाइन | आल इज़ वेल | बहती हवा सा था वोह | ज़ूबी डूबी ज़ूबी डूबी |
अंक: ****
निर्देशक:राजकुमार हिरानी
निर्माता:विधु विनोद चोप्रा
कलाकार: आमिर खान,माधवन, शरमन जोशी, करीना कपूर, बोमन ईरानी, ओमी वैद्य, परीक्षित शनि, जावेद जाफरी
संगीत: शांतनु मोइत्रा





11 नवम्बर)

(30 सितम्बर)



















