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लता मंगेशकर

ऐ मेरे वतन के लोगों (Ae mere watan ke logo)
गायक - लता मंगेशकर


ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी

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शोले

"तेरा क्या होगा कालिया" संवाद आज तक सबके दिलो दिमाग पर है| हिन्दी सिनिमा की सबसे प्रशंसनीय फ़िल्मो मे से एक फिल्म है शोले| एक गाँव रामगढ़ मे निर्देशित, यह एक परंपरागत हिन्दी फिल्म है जो आज तक हिन्दी फिल्म प्रशंसको के दिल मे घर कर बैठी है| हज़ारो बार देखने बाद भी लोग इसे देखते नही थकते| जय और वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का डर, सूरमा भोपाली और जैलेर का हास्य, और टाँगेवाली बसंती और उसकी धन्नो- हर पात्र ने दिलो दिमाग़ पर अपनी छाप छोड़ी है|

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लगान- ओ पालनहारे

ओ पालनहारे (O PaalanHare)
फिल्म - लगान (Lagaan)
संगीत -
ए.आर.रहमान

ओ पालनहारे, निरगुन और न्यारे - 2
तुमरे बिन हमरा कौनों नाहीं

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महबूबा - मेरे नैना सावन भादो

मेरे नैना सावन भादों (Mere Naina Sawan Bhado)
गायक - महबूबा (Mehbooba)
गायक - किशोर कुमार     
संगीत - आनंद बक्शी   


(मेरे नैना सावन भादों
फिर भी मेरा मन प्यासा ) -2

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दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे-हो गया

ना जाने मेरे (Na Jaane Mere)
 फिल्म - दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे (Dilwale Dulhaniya Le Jaaenge)
गायक  -  लता मंगेशकर, कुमार सानु


ना जाने मेरे दिल को क्या हो गया
अभी तो यहीं था अभी खो गया

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आनंदक्या फ़र्क हैं 70 साल और 6 महीने में| मौत तो एक पल हैं बाबुमोशाय| आने वाले 6 महीनो में जो लाखो पल मैं जीने वाला हूँ उसका क्या होगा बाबुमोशाय| ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नही| हद कर दी| मौत के डर से अगर जीना छोड़ दिया, तो मौत किसे कहते हैं| बाबुमोशाय जब तक ज़िंदा हूँ तब तक मरा नही, जब मर गया साला मैं ही नही तो फिर डर किस बात का| ए बाबुमोशाय अपनी ज़िंदगी बड़ी हैं, लेकिन वक़्त बहुत कम हैं इसलिए जल्दी जल्दी जीना पड़ता हैं|

फिल्म के ये संवाद फिल्म की कहानी बयान करते है|

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मदर इण्डियावास्तविक जीवन में अपने परिवार के सम्पूर्ण कष्ट अपने प्राणों पर भी झेल कर अपना जीवन हँसते हँसते न्योछावर  करने वाली  नारी की गाथाएं बहुत सारी  फिल्मों का प्रधान विषय रही हैं| महबूब खान की फिल्म "मदर इण्डिया" एक ऐसी ही महिला की कहानी है,जिसके संघर्ष तो इतने थे कि उनका  अंत ही नहीं था ,परन्तु फिर भी वह अग्रसर थी अपने कर्तव्य पथ पर बिना  अपने आदर्शों से कोई समझौता करे| कहा जाए तो स्वाधीनता के एक दशक बाद रिलीस हुई इस फिल्म में नरगिस दत्त का किरदार पूरे हिन्दुस्तान का प्रतीक था|

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पाकीज़ा'आपके पावं देखे .. बहुत हसीन है, इन्हे ज़मीन पे मत उतारीएगा मैले हो जायेंगे'

ऐसे और नज़ाने कितने इस जैसे संवादों से बनी है यह फिल्म, पाकीज़ा| फिल्म जिससे बनने में 14 साल लगे, भारत में रंगीन फिल्में बनाने की नयी तकनीक आ गयी, जिसके बनने के दौरान कलाकारों के किरदार बदले गये, जिसके दौरान संगीत निर्देशक का निधन हो गया और फिल्म के रिलीस के 3 हफ्ते बाद फिल्म की मुख्य अभिनेत्री का भी निधन हो गया जो फिल्म को अमर कर गया|

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