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अतुल लखोटिया

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

यश चोपरा निर्देशित दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे हिन्दी सिनिमा के इतिहास मे सबसे सफलतम फिल्मों मे से एक है| बहुत कम ही ऐसा होता है की कोई फिल्म दर्शको को बहुत लंबे समय तक बाँधे रखती है और सिनिमा को एक नयी दिशा मे ले जाती है| इस फिल्म ने हिन्दी सिनिमा को एक नया आयाम दिया और आलम ये है क़ी 750 हफ्तों के बाद भी ये मुंबई के सिनिमा हॉल मे लगी हुई है जो की अपने आप में एक इतिहास है|

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शोले

"तेरा क्या होगा कालिया" संवाद आज तक सबके दिलो दिमाग पर है| हिन्दी सिनिमा की सबसे प्रशंसनीय फ़िल्मो मे से एक फिल्म है शोले| एक गाँव रामगढ़ मे निर्देशित, यह एक परंपरागत हिन्दी फिल्म है जो आज तक हिन्दी फिल्म प्रशंसको के दिल मे घर कर बैठी है| हज़ारो बार देखने बाद भी लोग इसे देखते नही थकते| जय और वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का डर, सूरमा भोपाली और जैलेर का हास्य, और टाँगेवाली बसंती और उसकी धन्नो- हर पात्र ने दिलो दिमाग़ पर अपनी छाप छोड़ी है|

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तारे ज़मीन पर

तारे ज़मीन पर!!आमिर खान एक ज़बरदस्त अभिनेता है ये तो सब जानते ही है, अपनी पहली निर्देशित फिल्म से उन्होने अपने दिशा कौशल का भी परिमाण दे दिया| आमिर खान की तारे ज़मीन पर ना सिर्फ़ दर्शकों का मनोरंजन करती है बल्कि एक ऐसा संदेश भी देती है समाज को जिसे हम सब जानते है पर याद नही रखते|

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lagaan

लगान, जैसा की आमिर खान कहते है, बनाना आसान नही था| .जब निर्देशक आशुतोष गोवारिकेर ने पहली बार आमिर को कहानी सुनाई थी,तो उन्होने सुनते ही साफ माना कर दिया| तब आशुतोष ने 6 महीने इस पर काम किया और फिर आमिर के पास आए|

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अनजाना -अनजानी

बॉलीवुड मे अक्सर जानी पहचानी प्रेम कहानियाँ सदियों से बनती आ रही है| सिद्धार्थ आनंद की अंजाना अंजानी भी उसी श्रेणी की फिल्म है पर थोड़ा हट के| फिल्म मे 2 अंजान लोग मिलते है, एक दूसरे से प्यार करने लगते है और कुछ पल बाद फिर अंजान हो जाते है| सिद्धार्थ आनंद ने एक प्रेम कहानी को नये तरीके से पेश करने का जोखिम उठाया है और उनके कलाकारों ने उनका भरपूर साथ दिया है|फिल्म 2 अंजान लोगो की कहानी है जो एक ही समय पर एक ही जगह आत्म हत्या करने आते है, प्यार मे गिरते है पर थोड़ी देर बाद फिर अंजान हो जाते है| अंजानो से प्रेमी से फिर अंजाने रिश्तो पर फिल्म है अजाना अंजानी|

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आनंदक्या फ़र्क हैं 70 साल और 6 महीने में| मौत तो एक पल हैं बाबुमोशाय| आने वाले 6 महीनो में जो लाखो पल मैं जीने वाला हूँ उसका क्या होगा बाबुमोशाय| ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नही| हद कर दी| मौत के डर से अगर जीना छोड़ दिया, तो मौत किसे कहते हैं| बाबुमोशाय जब तक ज़िंदा हूँ तब तक मरा नही, जब मर गया साला मैं ही नही तो फिर डर किस बात का| ए बाबुमोशाय अपनी ज़िंदगी बड़ी हैं, लेकिन वक़्त बहुत कम हैं इसलिए जल्दी जल्दी जीना पड़ता हैं|

फिल्म के ये संवाद फिल्म की कहानी बयान करते है|

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हम साथ साथ है

‘हम साथ साथ है’ एक ठेठ राजश्री फिल्म है जो एक आदर्श परिवार और उसके आदर्शवादी सदस्यों पर केंद्रित रहती है| 'नदिया के पार' और 'हम आपके हैं कौन..!' की तर्ज़ पर ही निर्देशक सूरज बड़जातीया ने एक संयुक्त परिवार की कहानी को पर्दे पर दिखाया है|

फिल्म की कहानी एक संयुक्त परिवार के इर्द गिर्द घूमती है जिसके सदस्य रामकिशन(अलोक नाथ) और ममता (रीमा लागू) की शादी की 25वी सालगिरह मानने के लिए एकजुट होते है| रामकिशनजी के 4 बेटे है- विवेक (मोहनीश बहल), प्रेम (सलमान खान), संगीता(नीलम) और विनोद (सैफ अली ख़ान) जो आपस मे एक दूसरे से बेहद प्यार करते है| संगीता की शादी आनंद(महेश ठाकुर) से हुई है और उनकी एक बेटी भी है|

कहानी आगे बढ़ती है और विवेक की शादी साधना (तबु) से हो जाती है, प्रेम की सगाई प्रीति (सोनाली बेंद्रे) से और विनोद को सपना (करिश्मा कपूर) से प्यार| प्रेम और प्रीति बचपन के साथी है और बचपन से ही एक दूसरे को पसंद करते है वही सपना और विनोद बचपन मे पड़ोसी थे|

रामकिशनजी का एक ही सपना है कि उनका परिवार हमेशा साथ रहे पर उन्हे तब झटका लगता है जब आनंद को उसके बड़े भाई अपने घर से निकल देते है| ये देखकर ममता की सहेलिया उसके कान भर देती है कि वक़्त आने पर विवेक भी अपने भाइयों को धोखा दे देगा| कहानी में नाटकीय मोड़ आता है पर अंत में रामकिशनजी के आदर्शों की जीत हम आपके हैं कौन..!होती है जब पूरा परिवार फिर से एक साथ हो जाता है|

देखा जाए तो कहानी में नया कुछ नही है और पूरी कहानी का आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है| पर निर्देशन और पटकथा सशक्त है और दर्शकों को उबने नही देती| 

अभिनय की बात करें तो सभी कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है| अलोक नाथ और रीमा का अभिनय काबिल-ए-तारीफ़ है|  सलमान खान ज़रूरत से ज़्यादा कोशिश करते दिखे वही सोनाली बेंद्रे भी कुछ ख़ास नही जची| जहाँ करिश्मा कपूर ने एक नटखट लड़की का किरदार बखूबी निभाया वही सैफ अली ख़ान भी खूब जचे|

फिल्म का संगीत राम लक्ष्मण ने दिया है और दर्शकों को काफ़ी पसंद आया| गाने फिल्म की कहानी पर जचते है और कहानी को आगे बढ़ते है|

संपूर्ण मे कहे तो दर्शकों को फिल्म मे कुछ नया देखने को नही मिलेगा पर फिर भी एक अच्छी पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है|

गाने:

यह तो सच है म्हारे हिवड़ा में नाचे मोर मैय्या यशोदा सुनोजी दुल्हन छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया
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मैंने प्यार कियासूरज बरजातिया निर्देशित 'मैने प्यार किया' उनकी सबसे बड़ी फिल्मों मे से एक है जिसने सलमान ख़ान के फिल्मी करियर को भी बुलंदियों पर पहुँचा दिया| फिल्म की कहानी कहे तो एक लड़का लड़की से मिलता है,दोनो मे प्यार हो जाता है पर उनके पिता उनके प्यार को मंजूर नही करते| अपने प्यार को साबित करने के लिए वे कड़ी मेहनत और सच्चाई से अपनी जंग लड़ते है| ऐसी फिल्म की कहानी तो कई बार सुनी हुई होगी  जिसमे कोई नाटकीय मोड़ नही आते,कोई अचंभे नही होते पर इसका मतलब ये नही की फिल्म मनोरंजक नही है| वास्तव मे तो इस फिल्म को जितनी बार देखा जाए कम ही है|

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